भारतीय वैज्ञानिकों का पूरे विश्व में बजा डंका, 1 दिन में ही खोज निकाला चांद पर लैंडर विक्रम

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मिशन मून, जिसने एक बार फिर से करोड़ों भारतीयों के दिलों में एक उम्मीद जगाई है। क्योंकि, इसरो से ये जानकारी सामने आई है कि, लैंडर विक्रम मिल चुका है और जल्द ही उससे संपर्क साध लिया जाएगा। खबरें ऐसी भी हैं कि, जिस जगह पर विक्रम को उतारना था, वो उस जगह से 500 मीटर दूर पड़ा है। फिलहाल इसरो वैज्ञानिक एक बार फिर से विक्रम के साथ कम्यूनिकेशन की कोशिश में लगे हुए हैं। साथ ही चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल तस्वीर भेजी है। जिसे देखने के बाद वाकई सभी के मन में आस जाग गई है। जिस तरह भारतीयों ने देश के वैज्ञानिकों का हौंसला अफजाई किया, उसी हौंसले और सकारात्मक सोच के कारण आज देश को इतनी बड़ी खबर मिली है।

इसरो चीफ ने दी लैंडर मिलने की जानकारी
आपको ये जानकारी तो है ही कि, लैंडर विक्रम को चांद की दक्षिणी ध्रुव सतह पर शुक्रवार-शनिवार को उतरना था। लेकिन, उससे 2.1 किलोमीटर पहले ही विक्रम लैंडर का धरती पर स्थित केंद्र से संपर्क टूट गया। जिस कारण एक पल के लिए सभी के सांसे थम सी गई। क्योंकि, जब इस बात का ऐलान किया गया उस समय वहां पीएम मोदी समेत देश के कई छात्र मौजूद थे। सभी लोग भारत की इस कामयाबी को करीब से देखना चाहते थे। लेकिन, संपर्क टूटने के बाद भी भारतीयों का हौंसला नहीं टूटा। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनल्स तक सिर्फ एक ही बात थी कि, हम होंगे कामयाब। और अब जब इसरो चीफ ने मीडिया को ये जानकारी दी है कि, विक्रम लैंडर के सटीक लोकेशन का पता चल गया है। लेकिन, उससे संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि, चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल तस्वीर भेजी है।’

दुनिया ने इसरो वैज्ञानिकों को किया सलाम
आपको ये जानकर भी बेहद खुशी होगी कि, भले ही भारत को अब तक ये कामयाबी हासिल नहीं हुई है। लेकिन, इसरो की कोशिशों पर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि, दुनिया के तमाम देश उन्हें बधाई दे रहे हैं। जो अपने-आप में एक बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि, भारत ने उस मिशन पर जाने की कोशिश की है। जहां अब तक कोई देश नहीं जा पाया। और जो कोशिश करता है वही एक दिन सफल होता है। ऐसा ही उदाहरण भारत ने पेश किया है। और खुद पीएम मोदी ने लैंडर विक्रम के संपर्क टूटने पर कहा कि, ‘जब मिशन बड़ा होता है तो निराशा से पार पाने की हिम्मत होनी चाहिए।’

14 दिनों तक करते रहेंगे कोशिश
आपको बता दें, आर्बिटर में SAR, IR स्पेक्ट्रोमीटर और कैमरे की मदद से 10 x 10 किलोमीटर के इलाके को छाना जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार लैंडर विक्रम का पता लगाने के लिए उन्हें उस पूरे इलाके की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें लेनी होंगी। वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि, लैंडर विक्रम यूं तो पूरे 7 साल तक खराब नहीं होगा। क्योंकि, उसमें ईंधन काफी है। लेकिन, सिर्फ 14 दिनों तक वैज्ञानिक विक्रम से संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि, अभी लूनर-डे चल रहा है। और एक लूनर डे धरती के 14 दिनों के समान होता है। जिनमें से दो दिन बीत चुके हैं। अब सिर्फ अगले 12 दिनों तक चांद पर दिन रहेगा। फिर चांद पर रात हो जाएगी। जो पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर रहेगी। इस कारण रात में लैंडर विक्रम से संपर्क करना मुश्किल होगा। ये भी पढ़ेंः- चंद्रयान-2 पर इसरो का बड़ा खुलासा, लैंडर विक्रम का इस कारण ISRO से टूटा संपर्क?