नई दिल्‍ली। तालिबान ने जब से अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, विश्व समुदाय में अफरातफरी मची हुई है। अफगानिस्‍तान में तालिबान की भावी सरकार को लेकर भारत समेत दूसरे देश गहन चिंतन में लगे हैं। हर देश तालिबान की मौजूदगी के हर पहलू पर विचार कर रहा है। भारत भी इस पर विचार कर रहा है। भारत पहले ही इस बात को कह चुका है कि उन्‍हें तालिबानी की कथनी और करनी पर कोई विश्‍वास नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ताजा बयान में कहा है कि भारत अफगानिस्‍तान पर पूरी नजर रखे हुए है। उनकी तरफ से ये भी कहा गया है कि फिलहाल भारत का ध्‍यान अफगानिस्‍तान में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित निकासी पर है। उन्‍होंने कहा कि वहां पर संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन के काम में भी परेशानी आ रही है।

विदेश मंत्री की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्‍तान के मुद्दे पर उन्‍होंने अंतरराष्‍ट्रीय मंच से काफी बातचीत की है। इस संबंध में उन्‍होंने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस से भी बात की है। इतना ही नहीं कई अन्‍य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। तालिबान सरकार को मान्‍यता देने और न देने के पीछे कुछ बड़ी वजहें हैं। गौरतलब है कि भारत ने अफगानिस्‍तान में करोड़ों डालर का निवेश किया हुआ है। तालिबान के यहां आने के बाद इस निवेश पर संकट के बादल भी मंडरा रहे हैं। वहीं ये भी स्‍पष्‍ट नहीं है कि इस पर अब आगे बढ़ा जाए या नहीं। तालिबान का रवैया भी ऐसा नहीं दिखाई देता है कि उस पर विश्‍वास किया जाए। वहीं एक बड़ी वजह ये भी है कि तालिबान एक आतंकी संगठन है जिसका अब एक राजनीतिक चेहरा सामने आया है। ऐसे में इसकी सरकार को मान्‍यता देना पूरी दुनिया में अलग-थलग होने जैसा है। ये भी तय नहीं है कि यदि ऐसा कर दिया जाए तो भी भारत के हित पूरे हो सकेंगे।

गौरतलब है कि तालिबान ने अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे के बाद विश्‍व समुदाय के साथ चलने की बात कही है। इतना ही नहीं तालिबान ने ये भी कहा है कि वो विश्‍व के देशों के साथ बातचीत चाहता है। हालांकि उनके पुराने ढर्रे को देखते हुए अधिकतर देश उनकी बातों पर विश्‍वास नहीं कर रहे हैं। बता दें कि अफगानिस्‍तान के मुद्दे पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में एक बार फिर से सीसीएस की बैठक हुई थी। इस बैठक में अफगानिस्तान के ताजा हालात से निपटने के लिए जो रणनीति पहले तय हुई थी, उसकी समीक्षा की गई है।

सूत्रों की मानें तो सरकार ने अफगानिस्तान से आने वाले हिंदुओं और सिखों को तुरंत शरण देने का आदेश भी दे चुकी है। इनको बाद में नागरिकता भी दी जाएगी। सरकार ने इनके लिए वीजा के आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने को भी कहा है। फिलहाल भारत सरकार की प्राथमिकता है कि अफगानिस्तान से हिंदुओं व सिखों को जल्द निकाला जाय।

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