नहीं मिला कोई जवाब..LAC पर है भंयकर तनाव..जानें किन मसलों पर भारत और चीन के बीच हुई वार्ता 

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पूर्वी लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनाव अनवरत बढ़ता जा रहा है। लिहाजा इस तनाव को कम करने के लिए लगातार वार्ता का सिलसिला जारी है। इस बीच रूस की राजधानी मॉस्को में शघाई सहयोग संगठन में शिरकत करने के लिए केंद्रीय रक्षा मंंत्री के बाद केंद्रीय विदेश मंत्री पहुंचें। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्ष चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने कई मसलों पर उनसे वार्ता की है। दोनों देशों पर मौजूदा तनाव को किस प्रकार से कम किया जा सके इस मसले को लेकर भी दोनों देशों के बीच वार्ता हुई। ये भी पढ़े :भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो अमेरिका नहीं देगा हमारा साथ? ये है बड़ी वजह

बॉर्डर की स्थिति पर भी हुई मंत्रणा 

यहां पर हम आपको बताते चले कि शघाई सहयोग संगठन में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बॉर्डर की स्थिति पर वार्ता हुई। सीमा पर किस तरह से विवाद को कम किया जा सके इस मसले को लेकर भी वार्ता हुई। सीमा पर चीनी सैनिकों की संख्या कम हो इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच मंत्रणा हुई। वार्ता के दौरान इस बात का भी जिक्र किया गया कि 1975 के बाद पहली मर्तबा सीमा पर गोली चलने जैसी घटना हुई है। भारत की तरफ से यह भी कहा गया कि चीन ने अपने इस कदम से 1993-1996 में हुए समझौते का भी उल्लंघन किया है। भारत का कहना है कि इस बैठक के बाद चीन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इस बीच दोनों देशों के बीच संयुक्त बयान भी जारी किया गया तो आइए जानते हैं तो दोनों देशों की तरफ जारी संयुक्त बयान में किन-किन बातों का जिक्र किया गया।

संयुक्त बयान में कहा गया कि इस मसले का पटाक्षेप वार्ता के माध्यम से किया जाना चाहिए और मतभेद को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। संयुक्त बयान में कहा गया कि मौजूदा समय में सीमा पर जिस तरह के हालात बने हुए हैं। वो किसी भी देश के पक्ष में नहीं है। लिहाजा इस मसले का निस्तारण करने हेतु वार्ता किया जाना अनिवार्य है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुपालन की प्रतिबद्धता जताई गई है और सीमा पर शांति स्थापित हो सके। इस दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही गई है। बॉर्डर की स्थिति को लेकर विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहे। ये भी पढ़े :बढ़ सकता है LAC पर तनाव! नहीं बदली ड्रैगन ने अपनी पोजिशन, भारत को उठाना पड़ा ये कदम