15 लाख को लेकर पति ने किया पत्नी से किनारा, तीन तलाक का मामला हुआ दर्ज

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यूपी। मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को लेकर मोदी सरकार ने तीन तलाक के मुद्दे को उठाया हैं। बता दें कि शादी शुदा मुस्लिम महिला का पति मौखिक रूप से तलाक कह दे तो उसी समय दोनों का तलाक हो जाता था। जिसके चलते मुस्लिम महिलाएं बेखर और बेसहारा हो जाती थी। महिला जाति के साथ खुले आम गलत हो रहा था और एक औछी परंपरा के चलते उनके साथ गलत किए जा रहा था। मोदी सरकार ने अपनी 2014 में सरकारी आते ही इन मामले को सबसे पहले उठाया। जब इस तीन तलाक के मामले को पूरी तरह से मंजूरी मिल गए हैं। मंजूरी मिलते ही हाल ही में महिला ने मुकदमा दर्ज करवाया है। इसे भी पढ़ें :गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा लेख- तीन तलाक जैसी कुप्रथा से महिलाओं को मिलेगा न्याय

दहेज में की पंद्रह लाख रुपये की मांग
बता दें कि सीपरी बाजार के सिद्धेश्वर नगर आईटीआई निवासी एक महिला ने आरोप लगाया है कि दहेज में पंद्रह लाख रुपये की मांग पूरी न होने पर पति ने तीन तलाक दे दिया। शिकायत पर पुलिस ने पति व दो गवाहों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

ससुराल वालों ने किया लगातार प्रताड़ित
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, थाना सीपरी बाजार के आईटीआई स्थित सिद्धेश्वर नगर निवासी एजाज उल हक की पुत्री अमरीन ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी शादी 16 नवंबर 2011 को ग्वालियर के कोतवाली लश्कर स्थित कदम साहब की गोट निवासी मोहम्मद आरिफ खान से हुई थी। दहेज में पिता ने अपनी हेसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। शादी के बाद तो सब कुछ बेहतर चला, लेकिन अचानक ससुरा वालो ने दहेज में पंद्रह लाख रुपये की मांग करना शुरू कर दिया।

जबरदस्ती निकाले गए पीड़िता के अकाउंट से चार लाख
महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि मांग पूरी न होने पर उसे पीट कर तीसरी मंजिल पर बने कमरे में बंद कर दिया जाता था। उसे भूखा प्यासा भी रखा जाता था। जबरन चेक पर हस्ताक्षर कराकर खाते से करीब चार लाख रुपये भी निकाल लिए थे। इसी बीच महिला ने पुत्री को जन्म दिया था। इसके बाद उसे लगा कि सब बेहतर हो जाएगा, लेकिन पंद्रह लाख रुपये की मांग जारी रही। इसके बाद उसे मायके भेज दिया गया, तक से अब तक उसे मायके से नहीं बुलाया गया। कई बार सुलह समझौते के प्रयास हुए, जो नाकाम साबित हुए। इसे भी पढ़ें :तीन तलाक कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

मुकदेमा दर्ज होने के बाद भी नहीं सुधरा पति
इसके बाद 3 जुलाई 2014 को ससुरा वाले तलाकनामा लेकर घर पहुंचे। कहा गया कि पंद्रह लाख रुपये दो या फिर तलाकनामे पर हस्ताक्षर करो। जब इस तलाकनामें पर हस्ताक्षक करने से इंकार कर दिया तो उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उसने मेडिकल कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई। घरेलू हिंसा का मुकदमा न्यायालय में दाखिल किया गया, जो विचाराधीन है। एक अन्य मुकदमा भरण पोषण के लिए किया गया है। इसी दौरान पति ने एक स्टांप पर इकरारनामा तहरीर कर दिया, जिसमें उसने उल्लेख किया कि वह अब कभी रुपये की मांग नहीं करेगा और अच्छी तरह पत्नी व बच्ची को रखेगा। अपनी गलती मानकर वह नौ जनवरी 2017 को ससुराल ले गया।

तीन तलाक बोलकर किया पीड़िता को किनारा 
कुछ दिनों के बाद ससुराल में पुन: प्रताड़ित किया जाने लगा। छह माह बाद ही वह मायके आ गई। आरोप है कि 15 अप्रैल 2019 को पति ने ग्वालियर निवासी तारिक व जाहिद के सामने तीन तलाक बोलकर किनारा कर लिया। शिकायत पर पुलिस ने पति आरिफ समेत गवाह तारिक व जाहिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इसे भी पढ़ें: शत्रुघ्न सिन्हा के बदले सुर, तीन तलाक बिल पर पीएम मोदी के समर्थन में कही ये बात

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