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बीते दिनों केंद्र सरकार (India) पर इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस की मदद से पत्रकारों और एक्टिविस्टों की जासूसी कराने की बात कही गयी थी. अब केंद्र ने इन बातों को खारिज कर एक बयान जारी किया है और कहा कि ये रिपोर्ट देश की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से बनाई गयी है. इसमें किसी तरह की कोई सच्चाई नहीं है.

रिपोर्ट में स्पष्ट हो रही कुछ बातें

केंद्रीय सूचना- इलेक्ट्रॉनिक मंत्रालय में सचिव डॉ राजेंद्र कुमार ने बताया कि 17 मीडिया संस्थानों के कंसोर्टियम की रिपोर्ट तथ्यों को बिना जांच किए एक तरफा तरीके से जारी कर दिया गया. जो रिपोर्ट मिली है उसको पढ़कर यही लग रहा है कि एक साथ जांचकर्ता, अभियोजक और जज की भूमिका निभाने की कोशिश की गई है.

अतिरिक्त सचिव ने बोला कि खबरों से स्पष्ट होता है कि लिखने वाले ने कोई जांच पड़ताल या रिसर्च नहीं की है और पुरानी सोच और निष्कर्ष के आधार पर एकतरफा विश्लेषण सुना दिया. इस रिपोर्ट का पूरी तरह से भारत सरकार से करती है.

‘इंटरसेप्शन के लिए देश में बना हुआ कानून’

अपने पक्ष को रखते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में पत्रकारों और एक्टिविस्टों की जासूसी कराए जाने का आरोप लगाया गया है. हमारे देश में फोन इंटरसेप्ट (Intercept) करने के लिए भी एक कानून बनाया गया है. इस कानून के अंतर्गत केंद्र में गृह सचिव और राज्यों में सक्षम अधिकारी से बिना किसी परमिशन के कोई अफसर अपनी मर्जी से फोन इंटरसेप्ट नहीं कर सकता.

केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में ही कानून के अंतर्गत फोन इंटरसेप्टिंग (Intercept) की अनुमति दी जाती है. इस प्रकार की प्रत्येक इंटरसेप्टिंग का रिकॉर्ड बनाया जाता है और उसकी देखरेख भी की जाती है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम रिपोर्ट में दिए गए हैं, उनकी सरकार की ओर से कोई इंटरसेप्टिंग नहीं की गई.

पहले भी की गयी ऐसी तथ्यहीन बातें

डॉ राजेंद्र कुमार ने बोला कि इससे पहले भी ऐसी ही खबरें फैलाई गई थीं कि सरकार वॉट्सऐप के जरिए लोगों की जासूसी करवा रही है उनके बारे में जानना चाह रही है. लेकिन इन खबरों को बाद में तथ्यहीन पाया गया. खुद वॉट्सऐप ने भी सुप्रीम कोर्ट में यह कबूल किया कि ऐसी कोई जासूसी नहीं हो रही है.

उन्होंने बोला कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वॉट्सऐप की जो खबरें थीं वैसी ही खबरें एक बार फिर भारत और भारतीय लोकतंत्र को लज्जित करने के लिए फैलाई जा रही है. इस खबर के भारत सरकार मान्यता नहीं देता है इसका पूरी तरह भारत सरकार खंडन करती है.

17 मीडिया संस्थानों के कंसोर्टियम ने किया दावा

दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों के कंसोर्टियम का दावा है कि विभिन्न सरकारें अपने यहां पत्रकारों और ऐक्टिविस्टों की जासूसी करवाती है. रविवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के साथ कई कई देशों में करीब 180 पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और ऐक्टिविस्ट्स की जासूसी कराई गई थी. इसके लिए इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप के हैकिंग साफ्टवेयर पेगासस (Hacking Software Pegasus) का प्रयोग किया गया. रिपोर्ट में ये शक भी जताया गया है कि भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से ज्यादा पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश समेत बड़ी तादात में कारोबारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबरों को हैक किया गया.

इस तरह काम करता है पेगासस सॉफ्टवेयर?

बता दें कि पेगासस (Hacking Software Pegasus) एक मैलवेयर है, जो आईफोन और एंड्रॉइड डिवाइस को हैक कर सकता है. इससे मैलवेयर भेजने वाला शख्स उस फोन में पहले से जो मैसेज, फोटो और ईमेल हैं, उनको देख सकता है. केवल इतना ही नहीं, यह साफ्टवेयर उस फोन पर आ रही कॉल को भी रिकॉर्ड भी कर सकता है. इस साफ्टवेयर से फोन के माइक को गुप्त रूप से एक्टिव भी किया जा सकता है.

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