इन राज्यों के किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, अब पराली से भी होगी आमदनी

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देशभर में सर्दियों का मौसम नजदीक आते ही कई राज्यों में बड़े पैमाने पर पराली जलना शुरू हो जाती है. जो आगे चलकर एक धुंध में बदल जाती है. पराली की वजह से प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. चूंकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल खेतों से निकलने वाली पराली भी अब आपकी आमदनी का साधन बनेगी. जिससे आपको पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. बताया जा रहा है कि किसानों के पराली न जलाने को लेकर ईपीसीए लगातार इसका स्थायी समाधान ढूंढ़ने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए हर दो सप्ताह में उक्त राज्यों सहित कृषि मंत्रालय, इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन, एनटीपीसी और दिल्ली के अधिकारियों संग भी बैठकें की जा रही है।

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आमतौर पर किसानों के ऊपर पराली किसी बोझ से कम नहीं हैं, चूंकि खेतों में फसल निकलने के बाद इन पराली का और कुछ किया भी नहीं जा सकता, इसलिए इन्हें जला दिया जाता है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा पराली जलाने की घटनाएं रोकने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये हो रही इन बैठकों में शामिल ईपीसीए अध्यक्ष भूरेलाल और सदस्य सुनीता नारायण का कहना है कि पराली को एक उपयोगी सामान (यूटिलिटी) में बदलने की जरूरत है. अगर पराली बिकने लगेगी तो फिर किसान इसे

जलाएंगे नहीं. बड़ी-बड़ी कंपनियां पराली खरीदेंगी और इससे बायो सीएनजी तथा बिजली बनाएंगी. इन हालातों में पराली जलाने की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा और दिल्ली एनसीआर की हवा भी प्रदूषित नहीं होगी।

ईपीसीए का कहना है कि पराली को किसान के खेत से लेकर यदि संयंत्र तक पहुंचाया जाए तो उसका फायदेमंद इस्तेमाल भी हो सकता है और इससे लोगों को प्रदूषण से भी काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा। भूरेलाल (अध्यक्ष, ईपीसीए) का

कहना है कि पंजाब में 97 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है.अगर इसी प्रयोग को विस्तार दिया जाए तो पराली की समस्या से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है, दो सप्ताह बाद इसकी समीक्षा की जाएगी. प्रयास है कि सर्दियों से पहले ही दिल्ली एनसीआर को पराली के धुएं से बचाने की ठोस व्यवस्था हो जाए।

मालूम हो कि इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन और एनटीपीसी पराली से एथनॉल निकालने की सहमति पहले ही दे चुके हैं. लिहाजा, ईपीसीए ने अब इसके लिए सभी सरकारों और विभागों को पूरी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है, इसके लिए

पराली को खेतों से उठाने, गोदाम तैयार करने और संयंत्रों के जरिये उन्हें बिजली अथवा बायो-सीएनजी में तब्दील करने का एक पूरा ढांचा विकसित करने को कहा गया है। अधिकारियों की मानें तो बहुत जल्द हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अब फसल ही नहीं बल्कि कृषि अवशेष यानि पराली भी आमदनी का जरिया बनेगी।