Friday, December 3, 2021

इस भारतीय मिसाइल की रेंज में आ गया पूरा एशिया, परमाणु हथियार ले जाने में है सक्षम

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दिल्ली। भारत ने मिसाइल की दुनिया में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत की परमाणु शक्ति संपन्न अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का 27 अक्टूबर 2021 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड पर सफल परीक्षण किया गया है। अग्नि-5 की रेंज 5000 किलोमीटर है। यह मिसाइल 5000 किलोमीटर तक मार करने में अचूक है। भारत सरकार की नीति है कि वह पहले किसी हथियार का उपयोग नहीं करेगी। फिलहाल किया गया परीक्षण सैन्य क्षमता और ताकत बढ़ाने के लिए है। इस मिसाइल से एशिया के कई बड़े शहर भारत के निशाने पर आ गये हैं। इंसान औसतन 6 सेकेंड में एक बार पलक झपकाता है। इतनी देर में तो ये मिसाइल करीब 50 किलोमीटर दूर चली जाएगी।

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Agni range 5

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले अग्नि-5 मिसाइल को लेकर चीन समेत कई देशों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। भारत पहले ही अग्नि-5 मिसाइल का सात बार सफल परीक्षण कर चुका है। चीन की नाराजगी इसलिए है क्योंकि अग्नि-5 मिसाइल की रेंज में उसका पूरा देश आ रहा है। अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने मिलकर बनाया है।
अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का वजन 50 हजार किलोग्राम है। यह 17.5 मीटर लंबी है। इसका व्यास 2 मीटर यानि 6.7 फीट हैं। इसके ऊपर 1500 किलोग्राम वजन का परमाणु हथियार लगाया जा सकता है। इस मिसाइल में तीन स्टेज के रॉकेट बूस्टर हैं जो सॉलिड फ्यूल से उड़ते हैं। इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है। एक सेकेंड में 8.16 किलोमीटर की दूरी तय करती है। यह 29,401 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दुश्मन पर हमला करती है। अग्नि-5 में रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, जीपीएस, सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगा हुआ है।

अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अपने निशाने पर सटीकता से हमला करता है। किसी वजह से अगर सटीकता में अंतर आता भी है तो वह 10 से 80 मीटर का ही होगा। अग्नि-5 को लॉन्च करने के लिए जमीन पर चलने वाले मोबाइल लॉन्चर का उपयोग किया जाता है। इसे ट्रक पर लोड करके सड़क से किसी भी स्थान पर पहुंचाया जा सकता है।

इस मिसाइल के बारे में वैज्ञानिक एम. नटराजन ने साल 2007 में पहली बार योजना बनाई थी। भारत अगर इस मिसाइल को दागता है तो वह पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक हमला कर सकता है। इस मिसाइल की सबसे खास बात है इसकी तकनीक (मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स)। इस तकनीक में मिसाइल के ऊपर लगाए जाने वॉरहेड में एक हथियार के बजाय कई हथियार लगाए जा सकते हैं। एक मिसाइल एक साथ कई टारगेट पर निशाना लगा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की तैनाती स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड में किया जा सकता है। इस कमांड के तहत ही भारत की सभी मिसाइलों का संचालन किया जाता है। इसमें पृथ्वी, अग्नि और सूर्य जैसी मिसाइलें शामिल हैं। ज्ञात हो कि सूर्य मिसाइल अभी बनी नहीं है। इसकी रेज 12 से 16 हजार किलोमीटर होगी। उससे पहले अग्नि-6 बनाई जाएगी जो 8 से 12 हजार किलोमीटर रेंज की होगी। इसी कमांड में समुद्र में मौजूद सैन्य मिसाइलें भी शामिल हैं. जैसे- धनुष, सागरिका आदि हैं।

ज्ञात हो अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को हुआ था। उसके बाद 15 सितंबर 2013, 31 जनवरी 2015, 26 दिसंबर 2016, 18 जनवरी 2018, 3 जून 2018 और 10 दिसंबर 2018 को सफल परीक्षण हुए। कुल मिलाकर अग्नि-5 मिसाइल के सात सफल परीक्षण हो चुके हैं।

यह भी पढ़ेंः-अमेरिकी संसद ने रिपोर्ट में किया दावा, कहा- भारत भी बना रहा खतरनाक ‘हाइपरसोनिक मिसाइल’

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