दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड ताहिर हुसैन का बड़ा खुलासा, जानें कैसे हिंदुओं के खिलाफ रची पूरी साजिश

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर पर जमकर हंगामा हुआ। इसी कड़ी में दिल्ली में भी हिंसक प्रदर्शन हुआ। जिसमें आम आदमी पार्टी से निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन मास्टरमांइड निकला। ताहिर हुसैन इन दिनों दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है। जिसमें अब दिल्ली पुलिस ताहिर हुसैन से सख्त पूछताछ की है। जिसमें ताहिर हुसैन ने कई खुलासे किए है। पूछताछ के दौरान ताहिर से दिल्ली में दंगों की प्लानिंग से लेकर फंडिंग का खुलासा किया है। इतना ही नहीं, ताहिर ने बताया कि उसने हिंदुओं से बदला लेने के लिए दिल्ली में दंगों को अंजाम दिया। जिसमें खालिद सैफी और पीएफआई (PFI) का पूरा साथ मिला।

ताहिर और खालिद की मुलाकात
सरकारी कबूलनामे के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की पूछताछ में ताहिर हुसैन ने इस बात का खुलासा किया कि, ‘खालिद सैफी से मेरी बात हुई थी। जिसमें खालिद सैफी ने कहा था कि तुम्हारे पास राजनीतिक पावर और पैसा दोनों है इसलिए अब हमे हमारी कौम के लिए काम करना है और हिंदुओं के खिलाफ इस पावर को इस्तेमाल करना है। कश्मीर में धारा 370 हट चुकी थी और राम मंदिर और नागरिकता कानून भी लागू हो गया था। इसी वजह से खालिद सैफी ने कहा था कि अब पानी सिर के ऊपर से जा चुका है अब वक्त आ गया कि हम कदम उठाए। इसके बाद 8 जनवरी को खालिद सैफी ने मेरी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालीद से मुलाकात करवाई।’

यूं रची साजिश
ताहिर हुसैन ने कहा कि, ‘उमर खालिद से मेरी मुलाकात शाहीन बाग के पीएफआई के दफ्तर में हुई थी। यहां पर उमर खालिद ने कहा था कि वह मरने और मारने के लिए पूरी तरह तैयार है। इतना ही नहीं, इस दौरान खालिद सैफी ने कहा था कि पीएफआई का एक सदस्य दानिश हिंदुओं के खिलाफ जंग में हमारी पूरी फाइनेंशियल मदद करेगा। इसके बाद हमने पीएफआई के दफ्तर में बैठकर दिल्ली हिंसा की प्लानिंग की। इस दौरान पूरा मैप तैयार किया। जिससे दिल्ली सरकार हिल जाए। इस दौरान खालिद सैफी को भीड़ सड़कों पर उतारने की जिम्मेदारी मिली थी। खालिद सैफी ने अपनी जानकारों को सड़को पर उतरने के लिए तैयार कर लिया था। ’

ताहिर के मिला काम
ताहिर हुसैन ने दिल्ली पुलिस को बताया कि, ‘दिल्ली में हिंसा भड़काने के लिए मुझे सामान इकट्ठा करने की जिम्मेदारी मिली थी। इस दौरान मैंने कांच की बोतल, पेट्रोल, तेजाब और पत्थर इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। ये सभी सामान मेरे घर की छत पर रखे गए थे। दूसरी तरफ उमर खालिद भी अपनी दोस्त इशरत जहां के साथ मिलकर खुरेजी में धरना प्रदर्शन की तैयारी में लग गया। इसके बाद दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर धरने प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद 4 फरवरी को मेरी और खालिद सैफी की मुलाकात हुई। जिसमें दंगों को लेकर प्लानिंग की गई। इस दौरान उमर खालिद ने फंडिंग की पूरी तैयारी कर ली थी। PFI, जामिया कार्डीनशन कमेटी, कई राजनीतिक दल, वकील समेत मुस्लिम संगठन पैसों की मदद कर रहे थे। हमारी पूरी प्लानिंग थी कि चक्का जाम करवा कर पुलिस को पीटा जाएगा और दंगा भड़काया जाएगा।’

ट्रंप के सामने बड़ी प्लानिंग
ताहिर हुसैन ने पुलिस के सामने कबूला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब भारत आए थे तो खालिद सैफी ने कहा था कि कुछ बड़ा करने का वक्त है ताकि सरकार घुटने टेक दे। इसके लिए मैंने घर की छत पर खाली कांच की बोलते और पत्थर इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इसके अलावा मैंने चारो गाड़ियो में फुल पेट्रोल और डीजल भी भरवाने की बात कही थी ताकि पेट्रोल-डीजल बम आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। मैंने अपने मजदूरों को भी तैयार कर लिया था। इस दौरान उमर खालिद भी लोगों को सड़कों पर उतारने में लगा था। ताकि ट्रंप के सामने भारी भीड़ उतरे। वहीं, अगर इस दौरान पुलिस भीड़ को रोकती तो उन पर हमला किया जाता। इसीलिए मैंने पिस्टल भी थाने से छुड़वा ली थी।

लोगों को दी गई ट्रेनिंग
दिल्ली पुलिस को ताहिर हुसैन ने बताया कि, ’24 फरवरी को आगजनी की प्लानिंग थी इसलिए मैंने पहले ही अपनी छत पर लोगों को इकट्ठा कर लिया था। जिन्हें पूरी प्लानिंग समझा दी गई थी यहां तक कि इन लोगों को ट्रेनिंग में बताया गया था कि हमला सिर्फ पुलिसवालों और दूसरे समुदाय के लोगों पर होना है इस दौरान अपने समुदाय के लोगों को कुछ नहीं होना चाहिए। खास कर महिलाए और बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इस काम के लिए मैंने पड़ोसी के चांद बाग में रहने वाले अरशद कय्यूम, मोनू, अपने दफ़्तर के पास रहने वाले गुलफाम (जिसके पास अपनी पिस्टल भी थी), शरद अहमद हाजी, मूंगा नगर के लियाकत अली उसके बेटे रिशाद अली, दयालपुर के मोहम्मद रियान अरशद और अपने यहां काम करने वाले इलेक्ट्रिशयन मोहम्मद आबादी, अकाउंटेंट मोहम्मद शादाब और राशिद सैफी के अलावा अब अपने भाई शाह आलम को बुला रखा था।

ऐसे शुरू हुआ दंगा…
इसके आगे ताहिर हुसैन ने बताया कि, ’24 फरवरी के दिन करीबन डेढ़ बजे पत्थबरबाजी और आगजनी करवाई गई। इसके लिए मैंने अपनी छत के बाहर से सीसीटीवी तक हटा दिया था। इस दौरान सीसीटीवी की तार काट दी गई थी ताकि किसी के हाथ कोई सबूत न लगे। इसके बाद मैंने अपनी परिवार को किसी और जगह शिफ्ट कर दिया। खुद भी कहीं और चला गया था लेकिन इस दौरान मैं जानबूझकर दिल्ली पुलिस को फोन कर रहा था ताकि किसी का शक मेरे ऊपर न जाए। इतना ही नहीं, मैंने अपने भाई शाह आल और एक साथी के साथ मिलकर अपने घर की छत से फायरिंग भी की थी लेकिन इस पूरी प्लानिंग के बाद भी पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया।’

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