यात्रा करते हुए इन बातों का रखें विशेष ध्यान, इस सीट पर हो सकता है कोरोना का खतरा!

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दुनिया में कोरोना संकट एक वैश्विक बीमारी के रूप में उभर कर आ रहा है। इस महामारी से विश्व के लगभग 180 से अधिक देश बुरी तरह ग्रसित हैं। ऐसा कोई देश नहीं जहां महामारी ने अपने पैर नहीं पसारे हो। सार्स से बना कोरोना वायरस इंसान की जिंदगी में विष घोलने का काम कर रहा है। अब तक महामारी का आंकड़ा 2 करोड़ के नजदीक पहुंच चुका है। जबकि मौत का ग्राफ बीते दिनों काफी ज्यादा बढ़ा है। बता दें कि अब तक कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 7 लाख से अधिक है। जो सरकार से लेकर वैज्ञानिकों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि कोरोना को रोकने के लिए कई देशों में कठोर प्रयास किया जा रहा है। कोरोना वायरस के मद्देनजर अधिकांश देशों में लॉकडाउन किया गया है, ताकि इसके संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। बहरहाल 6 माह के लंबे अंतराल के बाद फिर से जीवन सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है। दरअसल महामारी के इस दौर में काफी दिनों से अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी थी।लेकिन अब कई देशों की स्थिति में फिर से सुधार आ रहा है।

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बता दें कि कोरोना के चलते रेल सेवाएं, बस सेवाएं, हवाई यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। लेकिन कई देशों की सरकारों के सामने यह चुनौती भी थी कि अगर सब पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा तो फिर देश की अर्थव्यवस्था को कैसे संवारेंगे?. हालांकि कई देशों में महामारी ने तांडव मचाया हुआ है. अमेरिका, ब्राजील, ब्रिटेन, भारत, इटली जैसे देशों में सबसे ज्यादा कोरोना के केसेज हैं। स्थिति को नियंत्रण में लाना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।बहरहाल 6 महीने से इस महामारी का दंश झेलने के बाद जीवन सामान्य रफ्तार पर आने की कोशिश में है, लेकिन तब भी ट्रेनें इस्तेमाल करने वालों की संख्या पहले की तुलना में 20 प्रतिशत रह गई है।

एक्सपर्टस का मानना है कि कोरोना वायरस से बचने के लिए खुद के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। जैसे- घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूर पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करें। चूंकि जितनी दूरी रहेगी उतना आप इससे बच सकते हैं। वहीं ट्रेन-बसों में सफर करने वाले लोग इन बातों का खास ध्यान रखें। अपनी आस-पास की सीटों को अच्छे से चैक कर लें, कोई गंदी चीज न पड़ी हो। लोगों से दूरी रखें। मास्क पहनें, अगर आपके आस-पास कोई कोरोना पैसेंट है तो उसके 5 फीट की दूरी बना लें। अगर उसके बिल्कुल भी नजदीक आए तो संक्रमण फैलने का चांस 5% से 20% तक बढ़ जाता है।

हालांकि अभी ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कोरोना संक्रमण रहने के दौरान बसों या ट्रेन से ट्रैवल कितना सेफ है. तब भी जीवन को पटरी पर लाने के लिए यातायात दोबारा शुरू करने के प्लान बनाए जा रहे हैं. भारत में भी लंबी दूरी की ट्रेनें फिलहाल बंद हैं, लेकिन 12 अगस्त के बाद इनपर कोई फैसला हो सकता है. इसी तरह से दिल्ली मेट्रो के लिए भी सेफ कम्युट के प्लान बनाए जा रहे हैं।

ट्रेन की तरह ही फ्लाइट में भी कोरोना संक्रमण का खतरा रहता है. हालांकि ये अपेक्षाकृत सेफ मानी जा रही है. इसके पीछे अमेरिका की वो स्टडी है जो प्रतिशत में खतरे का आकलन करती है. Emory University और Georgia Tech

की ये स्टडी साइंस जर्नल PNAS में आई. ये बताती है कि जैसे तमाम एहतियात के बाद भी कोई मरीज फ्लाइट में दाखिल हो गया तो उससे बीमारी कितनी दूर तक और कितने प्रतिशत तक असर कर सकती है।

जैसे मान लें कि 14वें सीट नंबर पर कोई कोरोना मरीज है तो उसके खांसने-छींकने पर वायरस के फैलने का सबसे ज्यादा खतरा उसके आगे और पीछे की दो-दो सीटों पर होगा। इससे दूर बैठे यात्रियों तक पहुंचते हुए खतरा 1% हो जाएगा. वहीं फ्लाइट क्रू, जो फ्लाइट में यात्रियों की मदद के लिए लगातार घूमते रहते हैं, उन्हें 5% से 20% तक खतरा होता है. वहीं हर मिनट के साथ वायरस के फैलने का खतरा 1.8% रहता है।

इसी तरह से दूसरे शहरों को, जैसे पेरिस को ही लें तो वहां मई से जुलाई के बीच 386 मामले आए, लेकिन कोई भी केस पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ा हुआ नहीं था. टोक्यो और ऑस्ट्रिया में भी यही देखा गया।

हालांकि ये स्टडी 3 घंटे से कम दूरी के यात्रियों पर हुई. अगर यात्रा 3 घंटे या इससे ज्यादा हो तो इसके परिणाम अलग होंगे. खासकर इंडेक्स पेशेंट के बगल में बैठे स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण का खतरा ज्यादा रहेगा। समूह में बैठे मरीज को

इंडेक्ट पेशेंट या पेशेंट जीरो कहा गया. स्टडी में निकलकर आया कि कोरोना के मरीज यानी इंडेक्ट पेशेंट से पांच सीट आगे-पीछे लोगों से लेकर आजू-बाजू की तीन सीटों तक पर बैठे यात्रियों में संक्रमण का औसत 0.32 प्रतिशत होता है।

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