5 महीने पहले ही बन चुका था ‘लेटर बम’ का प्लान, शशि थरूर के घर पर आखिरी बैठक में हुई थी ये बातचीत

94

ऐसे वक्त में जब कुछ महीनों बाद बिहार में चुनावी बिगुल बजने वाला है। राजस्थान और मध्यप्रदेश सरिखे राज्यों में पार्टी संर्घष कर रही है। सोनिया गांधी का स्वास्थ्य अस्वस्थ्य चल रहा है। हर मसलों को लेकर पार्टी विपक्ष के जाल  में फंसी हुई है तो ऐसी स्थिति में पार्टी को खुद को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। अपना जनाधार बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए..मगर इससे पहले ही पार्टी में लेटर बम फूट गया। कल इस संदर्भ में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। जिसमें कई मसले उभरकर सामने आए। राहुल गांधी का गुस्सा भी फूटा। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि कुछ नेता बीजेपी से मिले हुए हैं। इसके बाद कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने आकर इस्तीफे की पेशकश तक कर डाली।

ये भी पढ़े :राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस में घमासान! गुलाम नबी आज़ाद इस्तीफा देने को तैयार, कहा- बीजेपी से..

इसके बाद सियासी संवेदनशीलता को मद्देनजर रखते हुए राहुल गांधी को अपने बयान पर सफाई देनी पड़ गई। उन्होंने अपने बयान से पलटी मारते हुए कहा कि उनका इशारा उन नेताओं की तरफ था, जो पार्टी को तोड़ने के लिए काम कर रहे हैं। उधर, प्रियंका भी अपने भाई राहुल का ही साथ देती हुई दिखी। फिलहाल तो कल कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का निष्कर्ष यही रहा कि कांग्रेस सोनिया के शरण में रहेगी, मगर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह दावा किया गया है कि पार्टी में लेटर बम फोड़ने की तैयारी आज से 5 महीने पहले ही शशि थरूर के घर पर बन चुकी थी।

बता दें कि शशि थरूर के घर पर एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमे पी चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम, सचिन पायलट, अभिषेक मनु सिंघवी, मणिशंकर अय्यर सरीखे नेता शामिल हुए थे। इस बैठक में पार्टी को मजबूत करने की दिशा में पूरा खाका खींचा गया था। पार्टी में एक स्थायी नेतृत्व के हाथों में कमान जाए, इस मसले को लेकर भी चर्चा हुई थी।  बैठक के दौरान ही इस पत्र को लिखने की तैयार हुई, जिसमें कई नेताओं ने हस्ताक्षर किए। शशि थरूर के घर पर बुलाई गई डिनर की  पुष्टि किसी और ने नहीं बल्कि खुद अय्यर ने करते हुए कहा कि मुझे डीनर के लिए आमंत्रित किया गया था। यह बैठक पार्टी में जरूरी सुधार के लिए बुलाई गई थी, लेकिन उन्होंने लेटर को लेकर साफ कह दिया है कि उन्हें इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं थी।

इसके साथ ही चिदंबरम ने भी साफ कर दिया है कि वो इस मसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। बीते दिनों राजस्थान सियासी संघर्ष के जनक रहे सचिन पायलट ने भी इस मसले को लेकर कोई टिप्पणी करना मुनासिब न समझा। गौरतलब है कि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा था, जिसके बाद कल कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई,  जिसमें एक तरफ जहां यह फैसला लिया गया है कि कांग्रेस सोनिया के शरण में बनी रहेंगी तो वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी बिफरे हुए भी नजर आए।

ये भी पढ़े :कांग्रेस में फूटा अब लेटर बम..खौफ में आ गए राहुल, प्रियंका और सोनिया