कोरोना फैलाने के आरोप में बढ़ी चीन की मुश्किलें, इंटरनेशनल कोर्ट में भारत का ये वकील करेगा केस

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दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस को लेकर चीन की मुश्किलें अब बढ़ती जा रही हैं. चूंकि अंतरराष्ट्रीय सरकारों में पहले ही चीन की किरकरी हो चुकी है. वहीं अब चीन के खिलाफ कोरोना फैलाने के आरोप में इंटरनेशनल कोर्ट में केस दर्ज कराने की कवायद जोरों पर है, दरअसल चीन की वुहान लैब से फैले कोरोना वायरस ने अब तक कोरोड़ों परिवार के सुकून को छीन लिया है. इस वायरस के भयानक प्रकोप से 5 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. जिसका  जिम्मेदार केवल चीन ही है. बहरहाल इस बीच नीदरलैंड में भारत के एक वकील ने चीन के खिलाफ इंटरनेशल कोर्ट ऑफ जस्टिस में केस दर्ज कराने का मोर्चा खोल दिया है. बताया जा रहा है कि धर्मशाला के अधिवक्ता विश्व चक्षु ने विश्व भर में कोरोना फैलाने के आरोप में चीन के खिलाफ केस दर्ज करने को लेकर कोर्ट में परमिशन लेटर भी भेज दिया है. जिसके बाद से चीन की मुश्किलें अब तेज होने लगी हैं.

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बता दें कि चीन से नाराज अमेरिका भी बड़े पैमाने पर चीन को चोट पहुंचाने की तैयारी में हैं. हाल ही में अमेरिका ने WHO को लेटर लिख कर चीन के खिलाफ सख्त कार्यवाई करने की बात कही थी. वहीं इस केस के बाद चीन को इंटरनेशनल कोर्ट में कोरोना को लेकर माफी भी मांगनी पड़ सकती है.

चीन

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के अधिवक्ता विश्व चक्षु ने नीदरलैंड कोर्ट ऑफ जस्टिस के समक्ष यह मामला उठाया है. पत्र में कहा गया है कि दुनिया में कोरोना फैलाने के पीछे एकमात्र चीन का ही हाथ है. चूंकि जब चीन ने शुरूआती सैंपल नष्ट करने की बात (WHO) से छुपाई थी, तभी यह शक यकीन में बदल गया था कि चीन ही कोरोना वायरस को हवा देने वाला असली मास्टरमाइंड है. हालांकि नीदरलैंड कोर्ट में चीन के खिलाफ केस चलाने की अर्जी दे दी गई है.

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परमिशन मिलने के बाद भारत की तरफ से चीन पर मुकदमा चलाया जाएगा. उन्होंने बताया कि पत्र की प्रतिलिपि सर्वोच्च न्यायालय, भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और हिमाचल सरकार को भेज दी गई है. वहीं एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि आज पूरी दुनिया में कोरोना के चलते लाखों लोगों की नौकरी पर संकट आया है, बेरोजगारी बढ़ी है, अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी है. इन सबका जिम्मेदार चीन है. हालांकि अक्षु ने ये भी कहा कि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार काफी हद तक देश में कोरोना को सही समय पर कंट्रेल करने में कामयाब रही, नहीं तो आज भारत की दुर्दशा अमेरिका जैसी होने का डर बना रहता?.

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