भारत के इन कदमों से चीन का हाल बेहाल, अब बढ़ा रहा दोस्ती का हाथ 

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हमेशा से शांति की पेरौकारी करने वाले भारत को अगर कोई आंखें दिखाएगा तो भारत उसे नौंच डालने का माद्दा अपने अंदर रखता है। चाहे वो सीमा पर तनाव पैदा करने वाला पाकिस्तान हो या फिर अतिक्रमण करने वाला चीन। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पिछले कुछ दिनों से अतरराष्ट्रीय बिरादरी में यही देखने को मिल रहा है। चीन को उसकी मक्कारी का जब से भारत की तरफ से मुंहतोड़ जवाब मिला है, तब से वो कभी बिलबिलाता है, तो कभी गिड़गिड़ाता है, लेकिन इस बार वो गिड़गिड़ाया है। वो भी उस मुल्क के सामने, जिसको पहले वो कभी उसने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। अब उसके रूख में एकाएक एक क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कल तक भारत को धमकी देने वाला चीन आज भारत के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है। खैर, भारत ने अभी इसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया तो नहीं दिखाई है।

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चीनी राजदूत भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कह रहे हैं कि हम दोनों एक-दूसरे की जरूरत हैं। ध्यान रहे कि चीनी राजदूत ने भारत को इस दोस्ती का एहसास ऐसे समय में दिलाया है, जब गत दिनों भारत ने चीन के 48 एप्स पर प्रतिबंध लगाया। इसके बाद कई कारोबारी नियमों को बदले। जिससे दोनों देशों के कारोबारी हित खासा प्रभावित हुए। इस संदर्भ में तफसील से जानकारी देते हुए चीनी राजदूत ने ट्वीट कर कहा कि चीन ऐसे सभी रिश्तों की वकालत करता है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। हमारी अर्थव्यवस्था एक-दूसरे पर निर्भर है। जबरदस्ती दोनों के ट्रेड के विपरीत जाना, दोनों देशों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

इसके साथ ही चीन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन कोई विस्तारवादी नीति और रणनीतिक रूप से कोई खतरा नहीं है। चीन ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ही देशों के सदियों पुराने रिश्ते रहे हैं। हम कभी भारत पर आक्रमक नहीं रहे हैं। उधर, चीन ने कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए कहा कि आज की तारीख में चीन से ज्यादा खतरा कोरोना वायरस से हैं। चीनी राजदूरत वेईडोंग ने कहा, भारत और चीन के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लंबे इतिहास को खारिज करना संकीर्ण सोच को दिखाता है और ये नुकसानदायक भी है। इस बीच हर मसले को लेकर अपने आपको घिरता देख चीनी राजदूत ने कहा कि ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग, शिनजियांग और शिजांग चीन के आंतरिक मुद्दे हैं। इससे चीन की संप्रभुता और सुरक्षा जुड़ी हुई है। चीन न तो किसी के आतंरिक मसले दखल देता है और न ही किसी बाहरी पक्ष का दखल बर्दाश्त करता है।

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