सीमा विवाद पर CDS बिपिन रावत की चीन को चेतावनी, कहा- बातचीत से नहीं तो सैनिक ताकत से..

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कोरोना महामारी के बीच लगातार चीन के साथ भारत के संबंध में खटास बढ़ती जा रही है. दुनियाभर को अपनी विस्तारवादी नीति से डराने वाला चीन भारत (China-india) को भी आंख दिखाने में कसर नहीं छोड़ रहा है. लेकिन हिंदुस्तान भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है और चीन से शांतिपूर्ण रवैये की उम्मीद कर रहा है. इस महामारी के बीच कई बार भारत और चीन के सैनिकों के बीच छोटी मोटी झड़प से लेकर हिंसक झड़प भी हो चुकी है. लेकिन इसके बाद भी भारत चाहता है कि चीन प्यार से अपनी जगह पर सैनिकों को वापस बुला ले. इसके लिए दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के साथ वार्ता भी हो रही है.

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पूर्व लद्दाख में फिर से जारी दोनों देशों में सीमा विवाद (Border dispute) के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया है. दरअसल एक अखबार से बात करते हुए उन्होंने इस मसले पर कहा है कि यदि चीन से हो रही बातचीत नाकामयाब होती है तो इस मामले को बात से नहीं सैन्य विकल्प से सुलझाएंगे. यानी बिपिन रावत ने साफ शब्दों में चीन को चेतावनी दे दी है कि  बातचीत के बैकअप में भारत के पास सैन्य विकल्प अभी भी मौजूद है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अभी चीन से कूटनीतिक स्तर पर बात की जा रही है. फिलहाल दोनों देशों की सेनाएं शांतिपूर्ण तरीके से इस मसले को सुलझाने की कोशिश में लगी हुई हैं.

बातचीत के दौरान आगे बयान में बिपिन रावत ने ये भी कहा कि, पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से किए गए बदलावों को टक्कर देने के लिए एक सैन्य विकल्प हमारे पास है. सिर्फ दो देशों की सेनाओं के बीच हो रही बातचीत पर ही उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि LAC के साथ जो चेंजेज होते हैं वो कई अलग धारणाओं पर निर्भर करते हैं. रक्षा से संबंधित सेवाओं पर नजर गड़ाए रखने के साथ ही घुसपैठियों पर रोक लगाने के लिए ऐसे अभियानों को रोकने का काम दिया जाता है.’

इसके आगे सीडीएस (CDS) ने ये भी कहा कि, ‘जिस तरह की गतिविधि इस समय भारत-चीन के बीच जारी है, ऐसे में इन गतिविधियों को शांत तरीके से सुलझाने और घुसपैठ पर रोकथाम करने के लिए सरकार के सभी दृष्टिकोण को इस्तेमाल किया जाता है.’ रावत ने अपने बयान में कहा कि, ‘रक्षा सेवाएं हर वक्त सैन्य से जुड़े कामों के लिए तत्पर रहती हैं, वो चाहे उसमें एलएसी के साथ अच्छे संबंध को बहाल करने की हर कोशिशों का सफल न होना ही सम्मिलित क्यों न हो.’

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