Homeदेशताकतवर हिन्दुस्तान की बेमिसाल ब्रह्मोस, अब 500 किलोमीटर दुश्मन की खैर नहीं

ताकतवर हिन्दुस्तान की बेमिसाल ब्रह्मोस, अब 500 किलोमीटर दुश्मन की खैर नहीं

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भारतीय सेना को मजबूती प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार हर संभव कोशिश करने में जुटी हुई है। भारतीय सेना की ताकत देख दुश्मन भी थर्र-थर्र कांपता नजर आता है। या कहें कि, अक्सर दुश्मन भारत के शूरवीरों के आगे घुटने टेक देते हैं। पर फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते और लगातार अपनी नापाक हरकतों से हमलों को अंजाम देते हैं। लेकिन बालाकोट हवाइ हमलों के बाद सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए ब्रहमोस का मारक क्षमता को बढ़ाने की तैयारी कर ली है। जो मिसाइल अब तक 290 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने का काम करती थी। अब वही ब्रह्मोस एरोस्पेस मिसाइल 500 किलोमीटर तक दुश्मन के खेमे को भेदने का काम करेगी। इस मिसाइल की ताकत को बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने 40 से ज्यादा सुखोई लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस करने की प्रकिया भी तेज कर दी है।

ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत बढ़ाने की जानकारी ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने दी है। उन्होंने कहा कि, मिसाइल 500 किलोमीटर की बढ़ी हुई रेंज के उन्नत संस्करण के साथ पूरी तरह तैयार है। ब्रह्मोस के सीईओ बोले कि इस मिसाइल की सीमा बढ़ाना संभव है। इसका कारण है भारत का मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा होना। मिश्रा ने कहा कि भारत ने वर्टिकल डीप संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इसलिए ये मिसाइल अब दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार है।

ब्रह्मोस नाम ही क्यों?
ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत को तो सब ही जानते हैं। लेकिन इस मिसाइल का नाम ब्रह्मोस क्यों रखा गया ये बात बहुत कम लोग जानते हैं। दरअसल दो देशों की नदियों के नाम पर इस मिसाइल का नामकरण किया गया है। इन दो देशों का नाम है भारत और रूस, जिनकी नदियां हैं ब्रह्मपुत्र व मोस्कवा। इन्हीं के आधार पर इस मिसाइल का नाम ब्रह्मोस रखा गया है। क्योंकि ये प्रोजेक्ट भारत-रूस के अंतर्गत बनाया गया है। मिसाइल को बनाने वाली कंपनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया का साझा उद्यम है।

90 डिग्री तक दुश्मन को भेदने का लक्ष्य
सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मोस सेना, नौसेना और वायु सेना की पहली पसंद बन गया है और 90 डिग्री का लक्ष्य को भेदने वाला एक महत्वपूर्ण विमान वाहक है। उन्होंने बताया कि, ब्रह्मोस एरोस्पेस द्वारा विकसित की गई तकनीकें इससे पहले भारत या रूस जैसे देशों में मौजूद नहीं थीं।

भारत बना दुनिया का नंबर वन देश
आपको ये जानकर काफी हैरानी होगी कि, ब्रह्मोस मिसाइल का भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमान से परीक्षण किए जाने के बाद लड़ाकू विमानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों को एकीकृत करने वाला भारत दुनिया में एकमात्र देश बन गया है।

ब्रह्मोस मिसाइल की खूबियां

1.ब्रह्मोस मिसाइल पनडुब्बी, जहाज, एयरक्राफ्ट या जमीन से भी आसानी से लांच की जा सकती है।

2.ब्रह्मोस की रफ्तार अमेरिकी सेना की मिसाइल टॉमहॉक से भी चार गुना तेज है।
ये मिसाइल एयरक्राफ्ट से लांच होने पर 300 किलो के युद्धसामग्री ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।

3.मेनुवरेबल तकनीक से लैस होने के कारण दागे जाने के बाद यदि लक्ष्य रास्ता बदल लेता है तो यह मिसाइल भी अपना रास्ता बदल लेती है और हर हाल में दुश्मन को भेदने का लक्ष्य पूरा करती है।

4.भारतीय नौसेना ने 7 अक्टूबर 2012 को भी आईएनएस तेज से ब्रह्मोस को लांच किया था। जिसमें नौसेना को कामयाबी हासिल हुई थी।

अब आपको दिखाते हैं भारतीय सेना की वो ताकत जिसके आगे दुश्मन भी अपने घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है।

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