Amit Shah's appeal to listen to Modi's address

दिल्ली। पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बड़ी तैयारी में है। बताया जा रहा है कि नेतृत्व लगभग आधे नए चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। इससे सत्ता विरोधी माहौल को कम करने में मदद तो मिलेगी ही। साथ ही नए लोगों व नई पीढ़ी को उभारा जाएगा। इस कवायद में सामाजिक, जातिगत समीकरणों को तो साधा ही जाएगा। इनमें युवा व महिलाओं की भी काफी संख्या होगी। इस नीति के तहत वर्तमान विधायकों मंे आधे का टिकट कटना तय है।  ज्ञात हो कि अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के पास अधिकतम चार माह का समय है। हर राज्य में चुनावी टीमें तैनात हो चुकी हैं और क्षेत्र में दौरा कर रही हैं। प्रबंधन का काम भी शुरू हो चुका है। उम्मीदवार चयन का काम दीपावली के बाद शुरू होगा। भारतीय जनता पार्टी संगठन ने साफ कर दिया है कि वह नाम व कद के बजाए जमीनी स्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला लेगी। इसमें चेहरों को बदलना भी शामिल है। खासकर उन राज्यों में, जहां भाजपा सरकार में है। इससे निर्णय से वर्तमान में सत्ताधारी विधायकों से पार्टी अपने से दूर भी करेगी।

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नाराजगी पर भी होगा काम

भाजपा ने राज्यों में संगठन स्तर पर हर क्षेत्र के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भावी उम्मीदवारों को तलाशना भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि चुनाव होने वाले प्रत्येक राज्य में लगभग 50 फीसदी चेहरे नए होंगे। कई विधायकों को चुनाव मैदान से हटाकर दूसरे दायित्वों से जोड़ा जाएगा। उन्हें टिकट कटने की स्थिति में नाराजगी न हो, इसके लिए भी पार्टी पूरी तैयारी कर रही है। पार्टी उन्हें पर असंतुष्ट होने से बचायेगी। हाल में हो रहे उपचुनाव में हिमाचल प्रदेश में पार्टी को जिस तरह से बागी सुरों का सामना करना पड़ रहा है, उससे भी पार्टी सतर्क है। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि पार्टी में टिकट को लेकर अंदरखाने की कलह नहीं होनी चाहिए।

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प्रबंधन के साथ चेहरों पर भी नजर

भाजपा ने हर राज्य में चुनाव प्रभारी व सह प्रभारी नियुक्त किए हैं। उम्मीदवारों के चयन में इस बार इनकी राय भी अहम होगी। प्रभारियों की टीम को हर विभानसभा सीट के राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों के अध्ययन के साथ मौजूदा विधायक को लेकर भी आकलन करने को कहा गया है। इसके अलावा वह नए चेहरों पर भी नजर रखेंगे। नये चेहरे पार्टी के लिए एक नयी उम्मीद साबित होंगे। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राज्यों के दौरे शुरू कर दिए हैं। एक माह में वह चुनाव वाले हर राज्य के दौरे का एक चरण पूरा कर लेंगे।

गुजरात से आया है मॉडल

भारतीय जनता पार्टी को चेहरे बदलने से अधिकांश स्तरों पर हुए चुनाव में काफी लाभ मिला है। इसे गुजरात मॉडल भी माना जाता है। सबसे पहले गुजरात में स्थानीय निकायों में इसका उपयोग किया गया था। इसके बाद दिल्ली में बीते निकाय चुनावों में भी इस पर अमल किया गया है। अब इसे अन्य स्तरों पर भी रणनीति के हिसाब से लागू किया जा रहा है। चेहरे बदलने की रणनीति का फायदा जनता की नाराजगी से बचना भी है।

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