नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में अपने नए मंत्रिमंडल के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानकारी नहीं दे पाए थे, विपक्षी दलों ने खूब हंगामा किया था। अब पार्टी ने फैसला किया है कि तीन दिवसीय जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान सभी मंत्रियों को जनता के बीच पेश करेगी। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की यह यात्रा 16 अगस्त से शुरू होगी और 19 राज्यों से गुजरेगी। भाजपा की इस यात्रा में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, त्रिपुरा, झारखंड, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, ओडिशा, मणिपुर, महाराष्ट्र, असम, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य शामिल हैं।

मिली जानकारी के अनुसार सभी 43 मंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्र से लगभग 300 से 400 किलोमीटर दूर उतरेंगे और अगले तीन दिनों में एक खुले वाहन में तीन से चार लोकसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए अपने गृह जनपद तक यात्रा करेंगे। भाजपा की योजना लगभग 150 लोकसभा क्षेत्रों और 15 हजार किलोमीटर से अधिक को कवर करने की है, ताकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर के चुनावी राज्यों में भी पार्टी के भीतर तेजी लाई जा सके। उदाहरण के लिए, उर्जा मंत्री आरके सिंह निर्वाचन क्षेत्र आरा जाने के लिए गया में उतरेंगे जबकि श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव अलवर की ओर जाने के लिए राजस्थान में उतरेंगे। मंत्री रात को रास्ते में पड़ने वाले गांवों या छोटे शहरों में ठहरेंगे और तीन दिवसीय यात्रा के दौरान विभिन्न वर्गों के लोगों से मिलेंगे, उनके कार्यक्रम में प्रमुख धार्मिक संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राष्ट्रीय और राज्य स्तर के खिलाड़ियों, शहीदों के परिवारों, पार्टी कैडर से मिलना और धार्मिक स्थलों पर जाना शामिल है।

भाजपा के सभी सांसदों को भी 16 अगस्त से अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहने को कहा गया है। एक पार्टी नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले, इतिहास रहा है कि केंद्रीय मंत्री एक पेड़ की शाखा पर फल की तरह हुआ करते थे, जनता की पहुंच से बहुत दूर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मिथक को तोड़ना चाहते हैं, वह चाहते हैं कि उनकी परिषद का हर मंत्री जनता से जुड़ा रहे और जनता भी मंत्रियों के साथ जुड़ाव महसूस करे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कई ओबीसी और पिछड़ी जातियों और क्षेत्रों को पहली बार मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व मिला है और लोगों के बीच यह संदेश देना जरूरी है कि उनके लोगों में से एक को यहां जगह मिली है।

संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष और उसकी ‘मानसिकता’ की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्हें महिलाओं, दलितों और अनुसूचित जनजाति के सांसदों के मंत्री बनने के बाद उनका परिचय नहीं कराने दिया गया और जब वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से सम्बन्धित नए केंद्रीय मंत्रियों को पेश करने की कोशिश कर रहे थे तो विपक्षी दल के कुछ सदस्यों ने दिखाया कि वे खुश नहीं थे।

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