DGP की कुर्सी छोड़ने वाले गुप्तेश्वर पांडेय करेंगे राजनीति में एंट्री, बिहार के इस जिले से ठोकेंगे ताल!

542
DGP Gupteshwar Pandey politics speculation

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) केस में सुर्खियां बटोरने वाले बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे (DGP Gupteshwar Pandey) ने अपने सेवाकाल से 5 महीने पहले ही पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS ले कर सबको हैरान कर दिया है. इन्होंने बिहार के लाल को न्याय दिलाने का जिम्मा भी संभाला था और कई ऐसे बयान दिए थे जिससे महाराष्ट्र में खलबली मच गई थी. गुप्तेश्वर पांडे बिहार के तेज-तर्रार आईपीएस ऑफिसर माने जाते हैं और डीजीपी की कुर्सी छोड़ने के बाद से माना जा रहा है कि बहुत जल्द उनकी राजनीति में एंट्री हो सकती है.

बक्सर से लड़ेंगे चुनाव!
गुप्तेश्वर पांडे मूलरूप से बिहार के बक्सर जिले से ताल्लुक रखते हैं और सेनानिवृत्ति से कुल 5 महीने पहले डीजीपी की नौकरी छोड़ी है. इस कदम के बाद से ही ऐसा कहा जा रहा है कि वह राजनीति में एंट्री करेंगे और अब खबर है किbaksar dgp gupteshwar pandey वो गृह जिले बक्सर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. जी हां कयास लगाए जा रहे हैं कि गुप्तेश्वर पांडे विधानसभा चुनाव में ताल ठोंक सकते हैं और इन कयासों को बल भी उस तस्वीर से मिला है जो रिटायरमेंट से पहले वायरल हुई थी.

जेडीयू अध्यक्ष से मुलाकात
दरअसल, गुप्तेश्वर पांडे ने रिटायरमेंट से एक दिन पहले ही बक्सर जिला के जेडीयू अध्यक्ष से मुलाकात की थी. इस तस्वीर में वह सिविल ड्रेस में नजर आ रहे थे. तस्वीर सामने आने के बाद उनका कहना था कि, इसे राजनीति से ना जोड़ा जाए. लेकिन इसी तस्वीर के वायरल होने के अगले दिन उन्होंने वीआरएस ले लिया. जिससे हर कोई हैरान था.

सेवाकाल में दिया दूसरी बार इस्तीफा
मालूम हो कि गुप्तेश्वर पांडे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और सेवाकाल में वह एक बार नहीं बल्कि दो बार इस्ताफी दे चुका है. इससे पहले वह कई जिलों में एसपी और डीआईजी के साथ मुजफ्फरपुर के जोनल आईजी पद पर भी रह चुके हैं. साल 2019 में ही गुप्तेश्वर पांडे को डीजीपी की कुर्सी मिली थी और इस साल उन्होंने वीआरएस ले लिया जिसे सरकार की तरफ से भी मंजूर कर लिया गया. ऐसे में माना जा रहा है कि उनकी राजनीति एंट्री पर सिर्फ आधिकारिक ऐलान बाकी है. अगर ऐसा होता है तो वह बक्सर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी और वर्तमान विधायक मुन्ना तिवारी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं. वैसे साल 2009 में जब वह राजनीति में उतरने जा रहे थे तब उन्होंने लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था. ऐसे में देखना होगा कि, इस बार बिहार की राजनीति में क्या नया देखने को मिलता है.

ये भी पढ़ेंः- बिहार चुनाव: लालू को मिल सकता है मुंहतोड़ जवाब, सुशासन बाबू ने चली है ये चाल