lockdown में पूरा हुआ पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी का सपना..86 साल बाद कोसी रेल पुल बनकर हुआ तैयार 

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ऐसे वक्त में जब पूरा देश कोरोना (Coronavirus) के खिलाफ जंग में लॉकडाउन (lockdown) से गुजर रहा था। उस वक्त भी सोशल डिस्टेंसिंग (Social distancing) और अन्य नियमों का पालन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (atal bihari vajpayee) के सपने को पूरा करने की दिशा में कार्य किए गए हैं। आखिर अटल बिहारी वाजपेयी का सपना पूरा हो गया। कोसी नदी (kosi bridge) पर पुल बनकर तैयार हो गया। उत्तर बिहार (bihar) के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों का अब 86 साल पुराना सपना पूरा होने जा रहा है। फिलहाल तो इसकी तैयारी अपने अंतिम चरण में है। 23 जून को इस नवनिर्मित पुल पर पहली बार ट्रेन (Train) का सफलतापूर्वक परिचालन किया गया है।

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कब हुआ था शिलान्यास 
यहां पर हम आपको बताते चले कि इस परियोजना का शिलान्यास 2003-04 में शुरू किया गया था। इस परियोजना के लिए 323.41 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। 6 जून 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था। परियोजना की अनुमानित लागत  516.02 करोड़ बताई गई है। इस संदर्भ में रेलवे ने जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना महामारी (coronavirus) के खिलाफ जारी लॉकडाउन के दौरान भी इस काम को जारी रखा गया था। वहीं कार्य पूरा होने के बाद कोसी महासेतु सहित निर्मली सरायगढ़ रेलखंड को राष्ट्र को संपर्पित किया जाएगा।

आज से 86 साल पहले टूटा था पुल
बता दें कि यह पुल आज से 86 साल पहले 1934 में ध्वस्त हो गया था। इससे पहले कोसी के मनमानी धाराओं को नियंत्रित करने के लिए  सफल प्रयास पश्चिमी और पूर्वी तटबंध तथा बैराज निर्माण के साथ 1955 में आरंभ हुआ। तब जाकर 1959 में 120 किमी का तटबंध बनाकर पूरा किया गया था और1963 में भीमनगर में बैराज का कार्य पूरा किया गया था। इन तटबंधों तथा बैराज ने कोसी नदी के अनियंत्रित विस्थापन को संयमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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