स्वाभिमानी बेटी ने मां-बाप से कहा- IAS अफसर न बनूं, तब तक शादी नहीं करूंगी, 18वीं रैंक लाकर तोड़ दिया रिकॉर्ड

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यूपीएससी की परीक्षा को पास करना अपने आप में ही बड़ी बात है, जब आपका जुनून ही आपका पैसन बन जाए तो आपकी मेहनत एक न एक दिन जरूर रंग लाती है। हर साल यूपीएससी की परीक्षा कंडक्ट होती है, लेकिन कुछ लोगों के ही सर के ऊपर ताज सजता है। जिसने कड़ी मेहनत से इस परीक्षा को पास किया हो। इस बीच एक ऐसा किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं, जो आपके लिए काफी प्रेरणादायक हो सकता है। दरअसल बिहार की बेटी अभिलाषा ने जब यूपीएससी परीक्षा में 18वीं रैंक पाई तो उनके घर बधाई का तांता लग गया। पूरा परिवार खुशी से फूले नहीं समा पाया। हालांकि अभिलाषा के लिए यहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। लेकिन उनकी जिद्द के आगे किस्मत को झुकना ही पड़ा। अभिलाषा को यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ी। इतना ही नहीं उन्होंने इस परीक्षा के लिए अपनी शादी तक दाव पर लगा दी थी। दरअसल अभिलाषा की जिद्द थी कि जब तक वह आईएएस अफसर नहीं बन जाती, तब तक वो शादी नहीं करेंगी। इसके लिए उनके परिवार में भी उनका खूब सपोर्ट किया।

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अमूमन बिहार एक ऐसा राज्य है, बिहार ही क्यों अब तो हर राज्य में ऐसी सोच पाले बैठे हैं कुछ लोग की लड़कियां कुछ कर नहीं सकतीं। इसलिए उन्हें समय से पहले ही ब्याह दिया जाता है। लेकिन यह बात आज गलत साबित हो रही है.

चूंकि जिस तरीके से लड़कियों ने देश में नाम रोशन किया है। आज वह सभी के लिए मिसाल बनी हुई हैं। उन्होंने साबित

कर दिखाया है कि वह भी नील गगन की ऊंचाईयों को छू सकती हैं। जैसे बिहार की बेटी अभिलाषा ने IAS में 18 वीं रैंक लाकर सबके मूंह पर ताला लगा दिया है, जो लोग पहले क्या कुछ नहीं कहते थे आज वह सब खामोश हैं।

बता दें कि अभिलाषा का सपना था कि वो एक अच्छे सरकारी पद पर काम करें इसके लिए उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस ऑफिसर बनने की ठानी। 2014 में जब अभिलाषा ने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी तो वो प्री तक क्लियर नहीं कर पाईं थी। लेकिन परिवार और समाज को जवाब देने के लिये उन्हें जल्द से जल्द अच्छा परिणाम देना था।

पहले प्रयास में असफल होने के बाद अभिलाषा की हिम्मत का पुल अभी टूटा नहीं था, उन्होंने और प्रयास किया। इसके बाद 2016 में उन्होंने तैयारी के साथ किस्मत आजमाई जिसमें उनको 308 वीं रैंक मिली। इससे उनका सेलेक्शन आईआरएस सेवा के लिए हुआ लेकिन अभिलाषा इतने से संतुष्ट नहीं थी। उनका सपना ऊंची पोस्ट पाने का था। उन्होंने

फिर कोशिश की और 2017 के अपने तीसरे अटेम्पट में 18वीं रैंक पाकर अपने बचपन के सपने को साकार कर दिखाया। अब आप सोच सकते हैं कि कितनी परेशानियां और कितने तानों-बानों के शोर में रहकर अभिलाषा ने यह सफलता प्राप्त की। आज उनके जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है।

उनके माता-पिता बताते हैं कि अभिलाषा बचपन से ही पढ़ने में होशियार रही हैं, इसे लेकर परिवार वालों ने भी उन्हें सपोर्ट किया। मालूम हो कि अभिलाषा ने दसवीं और बारहवीं में टॉप करने के बाद महाराष्ट्र से इंजीनियरिंग एग्जाम्स की

तैयारी की। जहां उन्हें ए.एस पाटिल कॉलेज में दाखिला मिल गया था। अभिलाषा ने यूपीएससी की तैयारी के साथ-साथ जॉब भी की। चूंकि उनके सपने उनके हौसले से बड़े थे।

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