Friday, December 3, 2021

कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला, तीनो नये कृषि कानून वापसी के लिए केन्द्र ने बढ़ाया पहला कदम

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दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी के तीनों कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई। तीनों नये कृषि कानूनों की वापसी की संवैधानिक प्रक्रिया का पहला कदम मोदी सरकार ने आगे बढ़ा दिया है। कैबिनेट ने इन कानूनों को वापसी वाले बिल को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसे संसद में पेश किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने गत शुक्रवार को ही इन कानूनों का वापसी का ऐलान किया था। तीनों कानूनों केा वापसी के लिए बिल को संसद के शीत सत्र में पेश किया जाएगा। संसद का सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। पहले ही दिन यह बिल पेश होने वाला है। अब भी संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 40 संगठन दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि एमएसपी समेत 6 मांगों के पूरा होने पर ही घर जाएंगे।

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पीएम मोदी के ऐलान के बाद किसान संगठनों ने घोषणा किया है कि 29 नवंबर को 60 ट्रैक्टरों के साथ 1,000 किसान संसद की ओर कूच करेंगे। 26 नवंबर को किसानों ने एक बार फिर से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन का फैसला लिया है। 27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बार फिर से बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति को लेकर फैसला लिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जो सड़कें सरकार द्वारा खोली गई हैं। उन सड़कों से ट्रैक्टर गुजरेंगे। हम पर पहले सड़कों को ब्लॉक करने का आरोप लगाया गया था। राकेश टिकैत ने कहा कि हमने सड़क को अवरुद्ध नहीं किया था। सड़कों को ब्लॉक करना करना हमारे आंदोलन का हिस्सा नहीं है। हमारा आंदोलन सरकार से बात करना है। हम सीधे संसद जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम समाधान चाहते हैं।

rakesh tickit

खाप पंचायतों की सलाह, अब खत्म कर दें आंदोलन

किसान आंदोलन के समर्थकों के बीच भी इस आंदोलन को जारी रखने या बंद करने को लेकर मतभेद पैदा हो गये हैं। चैबीस खाप और गठवाला खाप के नेताओं का कहना है कि अब इस आंदोलन को समाप्त कर देना चाहिए। किसान आंदोलन खत्म कर किसानों को घर वापसी कर लेनी चाहिए। कई खाप नेताओं ने आंदोलन को जारी रखने का समर्थन करते हुए कहा कि एमएसपी को लेकर अभी संघर्ष चलते रहना चाहिए। बीते एक साल से किसान संगठन उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसानों के आंदोलन से कई रास्ते भी जाम हैं।

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