चीन को भारत से पंगा लेना पड़ा महंगा, UN में पड़ा अलग-थलग, इन देशों को मिला भारत का साथ

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इस संवेदनशील समय में भारत हर वो दांव चलना चाहता है, जिससे की चीन को वैश्विक समुदाय में पटखनी दी जाए। वहीं भारत का हर दांव सफल होता हुआ भी नजर आ रहा है। आर्थिक मोर्चे के बाद भारत का UN में भी चला दांव काम आ गया है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सभी देश भारत के पक्ष में नजर आ रहे हैं। यह सभी देश चीनी मसले को लेकर भारत का समर्थन कर रहे हैं। वहीं भारत को मिले इस समर्थन से अब चीन यूएन में अलग-थलग पड़ चुका है। चाहे वो फ्रांस हो या रूस या फिर ब्रिटेन या शुरू से हमारे सामरिक सहयोगी रहे अमेरिका..हर कोई चीन मसले को लेकर भारत का समर्थन कर रहे हैं। जिससे एक तरफ जहां ड्रैगन अंदर-अंदर ही खुन्नस खा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ अब वो यूएन के साथ-साथ पूरे वैश्विक समुदाय में भी अलग-थलग पड़ चुका है।

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अमेरिका
वहीं बात अगर अमेरिका की करें तो कोरोना काल की शुरूआत से ही अमेरिका चीन के खिलाफ भड़का हुआ है और लगातार उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कह रहा है। अब भारत चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सहयोगी बनकर उभर रहा है। चीन के खिलाफ भारत के साथ अमेरिका ने भी मोर्चा  खोल दिया है। बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। अमेरिका यूएन में एक शक्तिशाली देश मानाजाता है। जिससे चीन अब अलग थलग पड़ चुका है। यहां तक की अब तो अमेरिका ने यूरोप से अपने सैनिकों को निकालकर एशिया में तैनात करना शुरू कर दिया है। हिंद और प्रशांत  महासागर में भी उसने विमानवाहक पोत चीन की निगारानी के लिए तैनात कर दिए हैं। अमेरिका के इन कदमों से चीन यकीनन सकते में आ चुका है और भारत का पक्ष मजबूत होता जा रहा है। अमेरिका हमेशा से भारत का सामरिक सहयोगी रहा है और इस बार भी कुछ ऐसे ही संकेत देखने को मिल रहे हैं

रूस 
भारत और रूस के रिश्ते बेहद पुराने हैं और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। हाल ही में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक परेड कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए चार दिवसीय रूस दौरे पर गए थे। जहां पर उन्होंने रूस के उप प्रधानमंत्री से बात की और रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह बहुत जल्द ही भारत को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराएगा। बता दें कि रूस जैसे शक्तिशाली देश के भारत के समर्थन में आ जाने से चीन अब यकीनन खौफ में आ चुका है।

फ्रांस 
फ्रांस भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य देश है। वहीं इस संवेदनशील समय में रूस के भारत के समर्थन में आ जाने से चीन अब यकीनन अकेला पड़ चुका है। फ्रांस के रिश्ते भारत के साथ कुछ इस तरह के हैं, जहां पहले कभी रूस के भारत के साथ थे। हालांकि रूस की मित्रता चीन के साथ भी है, लेकिन कई अहम मौकों पर उसने भारत के पक्ष में आने से कोई गुरेज नहीं किया है। वहीं इस बार भी कुछ ऐसे ही संकेत देखने को मिल रहे हैं, जो कि हमारे लिए राहतभरे संकेत हैं।

ब्रिटेन 
ऐसी स्थिति में जब भारत और चीन के बीच विवाद अपने चरम पर है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इतने शक्तिशाली देश इस मसले को लेकर भारत का साथ दे रहे हैं, तो यकीनन ब्रिटेन ने भी इस मसले की गंभीरता को भांपते हुए भारत का साथ देना जरूरी समझा है। वहीं भारत भी लगाार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ज्वंलत मुद्दों को लेकर इन देशों को अपने पक्ष में करने में काफी हद तक कामयाब रहा है, जिससे चीन अब अलग थलग पड़ चुका है।

निष्कर्ष: वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इतने सारे शक्तिशाली देशों के भारत के समर्थन में आने से भारत का पलड़ा यूएन में भारी पड़ रहा है। जिससे चीन अब वैश्विक मंच पर अलग थलग पड़ चुका है। ये भी पढ़े :भारत चीन के बीच अब और बढ़ सकता है तनाव! लद्दाख के एक और इलाके में चीनी सेना ने जमाया डेरा