नहीं सुधर रहा चीन..अब भारत के बाद भूटान की इस जमीन पर ठोका अपना दावा..फिर मिला मुंहतोड़ जवाब

0
395

कुल मिलाकर यह कहना मुनासिब रहेगा कि हर मौके पर मुंह की खाने के बावजूद भी चीन अपनी नापाक करतूतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत के पूर्वी लद्दाख पर अतिक्रमण करने के बाद अब उसकी नापाक निगाहें भूटान के सरजमीं तक जा पहुंची है। लिहाजा अब वो अपने नापाक मंसूबों को धरातल पर उतारने के लिए मुस्तैद हो चुका है, मगर भूटान ने भी बड़ी दिलेरी के साथ चीन की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया है। दरअसल, पूरा मामला यह है कि चीन और भूटान के बीच सीमा का सीमाकंन नहीं हुआ है। इसी का फायदा उठाते हुए बीजिंग अब भूटान की इस जमीन पर अपना दावा ठोक रहा है।

ये भी पढ़े :चीन को डिजिटल झटका देने के बाद भारत ने तैयार किया एक और प्लान, जानें ड्रैगन को कैसे करेगी बर्बाद!

इसी को मद्देनजर रखते हुए चीन ने ग्लोबल इन्वायरमेंट फैसिलिटी काउंसिल की 58वीं बैठक के दौरान भूटान के सकतेंग वनजीव अभयारण्य (Sakteng Wildlife Sanctuary) की जमीन को विवादित बताते हुए उसकी फंडिंग का विरोध किया है। भले ही चीन इस जमीन को विवादित बताने पर तुला हो, मगर हकीकत यह है कि यह जमीन विवादित है ही नहीं.. बल्कि सीमा का सीमाकंन न होने के चलते वो इसका फायदा उठाते हुए अब उस पर अपना दावा ठोक रहा है। वहीं भूटान ने भी चीन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चीन की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया है। भूटान ने दो टूक कह दिया है कि यह जमीन उसकी थी..उसकी है और हमेशा उसकी रहेगी। भूटान ने चीन को साफ लहजे कह में दिया है कि सकतेंग वनजीन अभ्यारण भूटान का संप्रभु और अभिन्न हिस्सा है।

चीन ने ऐसे लपका मौके को … 
यहां पर हम आपको बताते चले कि सकतेंग वनजीन अभयारण्य कभी-भी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का हिस्सा नहीं रहा है और इस बार जब वह अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का हिस्सा रहा है, तो अब चीन ने यहा दांव चलते हुए इसी विवादित जमीन घोषित कर इसकी फंडिंग पर रोक लगाने की मांग की। मगर चीन के विरोध के बावजूद भी परिषद के अधिकांश सदस्यों ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। जिससे यह भी जाहिर होता है कि चीन अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह से अलग थलग पड़ चुका है।

ये भी पढ़े :चीन को भारत से पंगा लेना पड़ा महंगा, UN में पड़ा अलग-थलग, इन देशों को मिला भारत का साथ