आखिर चीन ने स्वीकार ही लिया गलवान का सच, अभी पूरा सच आना है बाकी

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दिल्ली। चीन अपनी साजिशों और चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल एलएसी पर कम होते तनाव के बीच चीन ने पहली बार माना है कि गलवान में उसके भी सैनिक मारे गए थे। चीन को यह सच स्वीकाराने में 10 महीने से भी ज्यादा लग गये। चीन ने पिछले साल जून में हुई खूनी झड़प के दौरान मारे गए चार सैनिकों की जानकारी साझा की है। एलएसी पर भारत और चीन के रिश्तों में जमीं बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है। दोनों देशों की सेनायें अब तेजी से हट रही हैं। पैंगांग झील के किनारे से चीन सेना हट चुकी है। कम होते तनाव के बीच चीन ने पहली बार माना है कि गलवान में उसके भी सैनिक मारे गए थे। चीन ने पिछले साल जून में हुई खूनी झड़प के दौरान मारे गए चार सैनिकों की जानकारी साझा की है। ज्ञात हो कि गलवान घाटी के इस खूनी झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे जिससे तनाव बढ़ गया था। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग ने काराकोरम पर्वत पर तैनात रहे पांच चीनी सैनिकों के बलिदान को याद किया। पीएलए शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजीमेंटल कमांडर क्यूई फबाओ, चेन होंगुन, जियानगॉन्ग, जिओ सियुआन और वांग जुओरन। इसमें चार की मौत गलवान के खूनी झड़प में हुई थी जबकि एक की मौत रेस्क्यू के वक्त नदी में बहने से हुई थी। चीन अभी भी गलवान के सच को स्वीकारने में हिचकिचा रहा है। चीन गलवान घाटी में मारे गए पीएलए सैनिकों का आंकड़ा काफी कम बता रहा है।

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बीते दिनों नॉर्दन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने बताया था कि गलवान घाटी की झड़प के बाद 50 चीनी सैनिकों को वाहनों के जरिए ले जाया गया था। इस गलवान की झड़प में चीनी सेना के काफी लोग मारे गए थे। चीनी सेना ने अपने सैनिकों को हटाने और सच दुनिया के सामने नहीं आ सके इसके लिए खासा प्रयास किया था। नॉर्दन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी के मुताबिक चीनी सैनिक 50 से ज्यादा जवानों को वाहनों में ले जा रहे थे लेकिन वे घायल थे या मरे इसके बारे में कहना मुश्किल है। वाईके जोशी ने कहा था कि रूसी एजेंसी 45 चीनी जवानों के मारे जाने की बात कही है और हमारा अनुमान भी इसी के आसपास है। चीन के अधिक जवानों के मारे जाने की दुनिया में पुष्टि हुई।

ज्ञात हो कि पिछले साल जून में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई थी। इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इस घटना में चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे लेकिन चीन ने इसे लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया था। गलवान घाटी में शहीद हुए 20 सैनिकों के नाम गणतंत्र दिवस से पहले नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में शामिल कर लिए गए थे। 20 भारतीय सैनिकों की याद में अक्टूबर में लद्दाख के एक दौलत बेग ओल्डी में वॉर मेमोरियल बनाया गया था जिसमें उस संघर्ष में शहीद हुए एक अफसर समेत 20 सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं।

गलवान घाटी में चीन के साथ हुई झड़प में जान गंवाने वाले कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र दिया गया। साथ ही गलवान घाटी के पांच अन्य जांबाजों को युद्धकाल के तीसरे सर्वोच्च सम्मान वीर चक्र से नवाजा गया। नायब सूबेदार नूडूराम सोरेन, हवलदार के पलानी, हवलदार तेजिंदर सिंह, दीपक सिंह, गुरतेज सिंह को वीर चक्र से नवाजा गया वो है। इस बीच भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया जारी है। गुरुवार को दोनों देशों के बीच इस प्रक्रिया का चैथा स्टेप भी शुरू हो गया है। समझौता होने के बाद दोनों ही देश तेजी से अपने सैनिकों, हथियारों और टैंकों को वापस बुला रहे हैं। डिसएंगेजमेंट के इस स्टेप में रेजांग ला और रेचिन ला से सेनाओं को पीछे हटना है। दोनों देशों से सेना हटने की प्रक्रिया का सत्यापन भी हो रहा हे।

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