जेटली के वित्तमंत्री बनते ही लिए ये 7 बड़े फैसलें, जिसने भारत की राजनीति में मचाया भूचाल

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यूपी। आज पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली का एम्स होस्पिटल में निधन हो गया। ऐसा बताया जा रहा था कि अरूण जेटली काफी समय से बीमार चल रहे थे। इसी के चलते उन्‍होंने लोकसभा चुनाव, 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल छोड़ने को कहा। लेकिन पहले कार्यकाल में बतौर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश के दौरान पांच नए कदम उठाए थे। इसके साथ ही कई बड़ी घोषणाएं भी की। जिसका लाभ अब पूरा देश उठा रहा है। इसे भी पढ़ें : अरुण जेटली की हालत बेहद नाजुक, 10 घंटे के भीतर दूसरी बार AIIMS जाएंगे अमित शाह

बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी (GST)  जैसा सबसे बड़ा टैक्स सुधार किया। वहीं, इसके साथ साथ जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर लॉन्च किया। जिसके चलते आर्थिक सुधार हो सके। इतना ही नही अरूण जेटली ने आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना को भी बढ़ावा दियो आर बजट में इसे लागू कर देश को विकासशील की ओर पहुंचाने की बेहतर कोशिश थी।

(1) साल 2014- मई 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद जुलाई में इस सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया। पहले बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि देश की जनता ने तेज आर्थिक विकास के लिए भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया है.मोदी सरकार ने अपने पहले बजट के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को 7-8 फीसदी GDP ग्रोथ के साथ ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा दिया।

(2) वहीं वर्ष 2015 में जेटली ने बजट पेश के दौरान यह दावा किया कि मात्र 9 महीने के अंजर अंदर मोदी सरकार में भारतीय अर्थव्यवस्था काफी सुधरी और बढ़ी हैं। वित्त मंत्री जेटली ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार हैं। मोदी के दौरान अर्थव्यवस्था के साथ भारत दुनिया का सबसे तेज बढ़ा है। जेटली ने जीडीपी (GDP) की नई सीरीज के हिसाब से 7.4 फीसदी विकास दर होने की उम्मीद जताई। इसे भी पढ़ें : पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की हालत बेहद गंभीर, वेंटिलेटर से हटाकर ECMO में शिफ्ट

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए दावा किया कि मोदी सरकार के सिर्फ 9 महीने के कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी है

(3)सबसे बड़ी घोषणाएं-  पूर्व अरूण जेटली ने जीएसटी और जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की स्कीम को लॉन्च किया था। यह कदम आर्थिक सुधार क पक्ष से काफी महत्वपूर्ण था।

(4) 2016- इस साल भारत की अर्थव्य्वस्था काफी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। जिसके चलते जीडीपी को भी अच्छे लेवल पर लेकर जाना था। जो काफी चुनौती पूर्ण था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत को सुस्त पड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच एक बेहतर भविष्य वाली इकनॉमी घोषित किया।

बता दें कि मोदी सरकार के समक्ष वैश्विक सुस्ती के अलावा बड़े घरेलू खर्च चुनौती बने। बजट में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा सभी कर्मचारियों तक पहुंचे उसके लिए अधिक पैसे खर्च होने थे। और वहीं उसी दौरान दो बार मानसून का खतरा भी था।

(5) फसल बीमा योजना- फसल बीमा योजना के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करना भी बड़े खर्च में से एक था। और सरकारी राजकोष भी कड़ी चुनौती नहीं थी क्योंकि सरकारी खजाने को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कमजोर कीमतों से मदद मिल रही थी। इसे भी पढ़ें : अमित शाह होंगे भारत के नए गृहमंत्री? सुषमा, जेटली और नड्डा को भी अहम जिम्मेदारियां

(6) साल 2017-जब बीजेपी की ओर से चौथा बजट पेश किा जाना था उसके ठीक पहले देशभर में कालेधन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया गया। सालाना बजट में कमजोर मांग बड़ी चुनौती बनकर उभरी। इससे पिछले दो बजट के दौरान देश में GDP ग्रोथ में तेजी देखी गई थी।

(7) साल 2018- केंद्र सरकार बजट से पहले पूर्व वित्तमंत्री अरूण जेटली से यह  उम्मीद कर रही थी। कि आने वाले समय में लोकसभा और आठ राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले सरकार कुछ लुभावनी घोषणा करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।वर्ष 2018 के बजट  में मध्यवर्ग को कुछ खास हाथ नहीं लगा। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके बजाए एजुकेशन सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया। इसके साथ ही मेडिकल री इम्बर्समेंट और कनवेंस एलोयेन्स को खत्म कर 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू कर दिया गया।

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