Categories
देश

मालेगांव विस्फोट में 15वें गवाह ने बताया सच, चार नेताओं का नाम लेने को किया था मजबूर

नई दिल्ली। मालेगांव विस्फोट मामले के एक गवाह ने अपने बयान का सच बता दिया। उसने मंगलवार को एक अदालत में दावा किया कि आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने उसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के चार नेताओं के नाम लेने के लिए मजबूर किया था। इस गवाह का बयान महाराष्ट्र एटीएस ने दर्ज किया था। ज्ञात हो कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह उस समय एटीएस के अतिरिक्त आयुक्त थे। परमबीर सिंह ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले की जांच की थी। सिंह जबरन वसूली के कई मामलों का अभी भी सामना कर रहे हैं। गवाह ने मंगलवार को विशेष एनआईए अदालत में गवाही दी है। एटीएस ने उसका बयान उस दर्ज किया था, जब वह मामले की जांच कर रहा था। एनआईए ने मामले की जांच की जिम्मेदारी बाद में संभाल ली थी। गवाह ने अदालत को बताया कि एटीएस के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी परमबीर सिंह और एक अन्य अधिकारी ने उसे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और इंद्रेश कुमार सहित आरएसएस के चार नेताओं का नाम लेने को कहा था। गवाह ने कोर्ट को बताया कि उस पर जबरन दबाव बनाया गया था।

20 गवाहों का परीक्षण किया गया

गवाह ने दावा किया कि एटीएस ने उसे प्रताड़ित किया था। एटीएस ने अवैध रूप से कार्यालय में बैठा कर रखा था। उसकी गवाही के बाद अदालत ने एटीएस के खिलाफ गवाही देने और आतंक रोधी एजेंसी के समक्ष कोई बयान देने से इनकार करने को लेकर उसे पक्षद्रोही गवाह (होस्टाइल विटनेस) घोषित किया। इस मामले में अब तक करीब 20 गवाहों का परीक्षण किया गया है, जिनमें से 15 मुकर गए हैं। गवाहों के मुकरने का सिलसिला लगातार जारी है।

29 सितंबर 2008 को हुआ था विस्फोट

मुंबई से करीब 200 किमी दूर मालेगांव कस्बे में 29 सितंबर 2008 को विस्फोट हुआ था। विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी। इस विस्फोट में 100 से अधिक घायल हो गए थे। मामले में आरोपी, लोकसभा सदस्य प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय रहीकर, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी जमानत पर जेल से बाहर हैं।

यह भी पढ़ेंः-कंगना ने ट्विटर पर लिखा ये शिवसेना के अंत की शुरूआत है