सरकार का दावा है कि सरकारी योजनाओं का ऑनलाइन आवेदन प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका कम हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है। उत्तर प्रदेश के जनपद बस्ती के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन की सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट कनेक्टिविटी है। कई गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क कभी आता है तो कभी घंटों गायब रहता है। 2G या बेहद कमजोर 3G नेटवर्क में सरकारी पोर्टल खोलना और फॉर्म भरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि आवेदन भरते समय अगर नेटवर्क चला गया तो पूरा फॉर्म दोबारा भरना पड़ता है। इससे न सिर्फ समय बर्बाद होता है, बल्कि लोगों का भरोसा भी सिस्टम से उठने लगता है। किसानों और मजदूरों का कहना है कि वे दिनभर खेत या काम पर रहते हैं और शाम को जब फॉर्म भरने बैठते हैं, तब नेटवर्क और भी कमजोर हो जाता है। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए सुविधा नहीं बल्कि परेशानी बनती जा रही है।
जनसेवा केंद्रों पर बढ़ती भीड़ और इंतजार
नेटवर्क की समस्या के चलते ग्रामीणों को मजबूरी में जनसेवा केंद्र यानी CSC का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन यहां हालात कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। सुबह से ही CSC पर लंबी कतारें लग जाती हैं। एक छोटे से काम के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई ग्रामीणों ने बताया कि कभी सर्वर डाउन रहता है तो कभी पोर्टल सही तरीके से काम नहीं करता। ऐसे में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है और अगले दिन फिर आना पड़ता है। एक किसान ने बताया कि योजना के आवेदन के लिए उनसे कई बार दस्तावेज दोबारा मंगवाए गए। कभी फोटो सही नहीं बताई गई, तो कभी आधार या बैंक डिटेल में छोटी सी गलती के नाम पर आवेदन रोक दिया गया। इससे लोगों में झुंझलाहट बढ़ रही है। खासकर बुजुर्ग और महिलाएं CSC तक बार-बार जाने में खुद को असहाय महसूस करती हैं।
तकनीकी जानकारी की कमी और बढ़ता भ्रम
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बहुत से लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया और तकनीकी शब्दावली की सही जानकारी नहीं है। उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि OTP क्यों नहीं आ रहा, आवेदन सबमिट हुआ या नहीं, और अगर रिजेक्ट हो गया तो कारण क्या है। कई महिलाएं बताती हैं कि आधार से मोबाइल नंबर लिंक न होने की वजह से उनका आवेदन कई बार अटक गया, लेकिन उन्हें यह जानकारी ही नहीं दी गई कि गलती कहां है और इसे कैसे सुधारा जाए। स्थिति जानने के लिए उन्हें फिर CSC जाना पड़ता है। इससे समय के साथ-साथ किराया और मजदूरी का नुकसान भी होता है। लोगों का कहना है कि अगर गांव स्तर पर ही किसी तरह की सहायता या मार्गदर्शन मिल जाए, तो वे खुद भी आवेदन करने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल तकनीकी ज्ञान की कमी ऑनलाइन व्यवस्था को उनके लिए और मुश्किल बना रही है।
अतिरिक्त खर्च और सुधार की मांग
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार CSC पर निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे मांगे जाने की बात सामने आती है। हालांकि वे किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाते, लेकिन यह जरूर कहते हैं कि गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च भारी पड़ता है। सरकारी योजनाएं जिन लोगों के लिए बनाई जाती हैं, वही लोग ऑनलाइन प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गांव स्तर पर सहायता डेस्क बनाई जाए, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा को बेहतर किया जाए और योजनाओं से जुड़ी स्पष्ट व सरल जानकारी स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाए। उनका मानना है कि अगर ये सुधार किए जाएं, तो ऑनलाइन आवेदन प्रणाली वास्तव में लाभकारी साबित हो सकती है। यह रिपोर्ट जनपद बस्ती के ग्रामीणों के अनुभवों पर आधारित है, जो यह सवाल खड़ा करती है कि क्या डिजिटल इंडिया का सपना गांवों तक उसी आसानी से पहुंच पा रहा है, जैसा कागजों में दिखता है।
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