Sunday, February 1, 2026
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उत्तर प्रदेश के इस शहर में पत्नी की थकान समझने वाले मिलते हैं पति! नाम सुनकर चौंक जाएंगे आप

उत्तर प्रदेश के एक शहर के पति बने नंबर वन! ‘गृहसाथी’ सर्वे में खुलासा—कौन से शहर के पुरुष घर के कामों में सबसे ज्यादा पत्नी की मदद करते हैं और कौन सबसे पीछे।

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भारत में पति-पत्नी के रिश्ते हमेशा से भावनाओं, जिम्मेदारियों और समझौते पर टिके रहे हैं, लेकिन घरेलू कामों को लेकर होने वाले झगड़े आज भी इस रिश्ते की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि घर का सारा काम महिलाओं की जिम्मेदारी है, जबकि पुरुषों का दायरा सिर्फ नौकरी और कमाई तक सीमित है। यही सोच अक्सर तनाव और असंतोष की वजह बनती रही है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। महिलाएं अब घरेलू श्रम को लेकर खुलकर बात कर रही हैं और पुरुष भी इस सच्चाई को समझने लगे हैं कि घर संभालना कोई आसान काम नहीं है। इसी बदलाव की झलक उत्तर प्रदेश में किए गए एक खास सर्वे में देखने को मिली, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर कौन से शहर के पति घर के कामों में सबसे आगे हैं और कौन अब भी पीछे छूटे हुए हैं।

‘गृहसाथी’ सर्वे और चौंकाने वाले आंकड़े

Selfie With Daughter Foundation द्वारा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में करीब साढ़े पांच साल तक एक विस्तृत सर्वे किया गया, जिसे ‘गृहसाथी’ नाम दिया गया। इस सर्वे में 13,400 से ज्यादा पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसमें पुरुषों से सीधे सवाल किए गए कि वे रोजमर्रा के घरेलू कामों में कितना योगदान देते हैं, पीरियड्स के दौरान पत्नी की किस तरह मदद करते हैं और बिना कहे कौन-कौन से काम संभालते हैं। सर्वे के नतीजे कई मायनों में चौंकाने वाले रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखपुर के पुरुष घरेलू कामों में सबसे ज्यादा सहयोग करने वाले पाए गए। औसतन वे दिन में करीब 14 मिनट घर के कामों में लगाते हैं। वहीं, लखनऊ और मुरादाबाद जैसे बड़े शहरों के पुरुष इस मामले में सबसे पीछे नजर आए, जहां घरेलू सहयोग का स्तर काफी कम पाया गया।

गोरखपुर क्यों बना ‘नंबर वन पति’ वाला शहर

सवाल यह उठता है कि आखिर गोरखपुर के पुरुष ही इस सर्वे में सबसे आगे क्यों निकले? सामाजिक जानकारों का मानना है कि छोटे शहरों में पारिवारिक जुड़ाव और आपसी समझ ज्यादा मजबूत होती है। यहां पति-पत्नी के बीच संवाद अधिक होता है और पुरुष अपनी पत्नी की मेहनत को नजदीक से देखते और महसूस करते हैं। यही वजह है कि वे घर के कामों में हाथ बंटाने को बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझते हैं। चाहे किचन का छोटा-मोटा काम हो, बच्चों की देखभाल हो या मुश्किल दिनों में पत्नी का साथ देना—गोरखपुर के पुरुषों ने यह साबित किया है कि बराबरी का रिश्ता ही मजबूत शादीशुदा जिंदगी की नींव है। यह सर्वे उन धारणाओं को भी तोड़ता है, जिनमें माना जाता है कि बड़े शहरों के लोग ज्यादा प्रगतिशील होते हैं।

घर का काम भी उतना ही अहम जितनी सैलरी वाली नौकरी

घरेलू कामकाज को कम आंकने की मानसिकता पर सुप्रीम कोर्ट भी पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुका है। एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं द्वारा घर संभालना, परिवार की देखभाल करना और बच्चों की परवरिश करना, किसी वेतन पाने वाली नौकरी से कम नहीं है। इन कामों का मूल्य पैसों में नहीं आंका जा सकता। ‘गृहसाथी’ सर्वे और सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी दोनों ही समाज को एक स्पष्ट संदेश देती हैं कि घर का काम साझा जिम्मेदारी है, सिर्फ पत्नी का कर्तव्य नहीं। अगर पति इसमें सहयोग करते हैं तो न सिर्फ रिश्ते मजबूत होते हैं, बल्कि परिवार का माहौल भी खुशहाल बनता है। यह रिपोर्ट उन पुरुषों के लिए भी आईना है, जो अब भी घरेलू कामों को नजरअंदाज करते हैं।

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