संयुक्त राष्ट्र ने दिया नेपाल को झटका, विवादित नक्शे पर सुनाया ये फैसला

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NEPAL

नेपाल ने भारत के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया था। नेपाल ने अपना नया नक्शा संसद में पेश किया था। इस नक्शे में नेपाल ने भारतीय हिस्से के लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपन बताया था। हैरानी की बात ये है कि इस विवादित नक्शो को नेपाल की संसद में पास भी कर दिया था। जिसके बाद नेपाल इस विवादित नक्शे को दुनिया के सामने पेश करने की तेयारी में था लेकिन इससे पहले ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने नेपाल को करारा झटका दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा कि अधिकारिक कामकाज के लिए संस्था न तो नेपाल के नए विवादित नक्शे को स्वीकार करेगे और न ही मान्यता देंगे।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वो प्रशासनिक कार्यों के लिए इस क्षेत्र से संबंधित भारत, पाकिस्तान या चीन के नक्शे का इस्तेमाल भी नहीं करेगा। वहीं इसके आगे UN ने कहा कि नेपाल ऐसे किसी भी मामले को जब भी सदन में रखेगा तो सिर्फ कूटनीतिक प्रोटोकाल को ही स्वीकार किया जाएगा। बता दें कि जल्द ही नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भेजने की तैयारी में है। जिसमें भारत के हिस्से को नेपाल में दर्शाया जाएगा। लेकिन उससे पहले ही न्यूयॉर्क में वैश्विक संस्था की तरफ से ये बयान सामने आ गया। जिससे साफ हो गया कि दुनिया में नेपाल के दावो को कोई नहीं सुनेगा।

बता दें कि यूएन की तरफ से ऐसा बयान इसलिए आया क्योंकि यूएन सभी नक्शों को वैधानिक चेतावनी के साथ जारी करता है। यूएन मैप्स डिस्क्लेमर में भी साफ लिखा गया है कि, ‘नक्शे में दिखाई गई सीमा लिखे गए नाम और पदवी, संस्था की ओर से किया जाने वाला प्रचार नहीं है और न ही ऐसे किसी प्रचार को यूएन स्वीकार करता है। गौरतलब है कि इससे पहले भारत भी इस बात को पहले ही साफ कर चुका था कि नेपाल के इस नक्शे को कोई भी स्वीकार नहीं करेगा। क्योंकि नेपाल के पास इसके ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

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