Benjaminh

दिल्ली। इजरायल में 12 सालों से लगातार प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू का युग अब खत्म होने को है। नेतन्याहू को संसद में बुधवार आधी रात तक बहुमत साबित करना था। निर्धारित समय से 35 मिनट पहले येश एटिड पार्टी के नेता येर लेपिड ने राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन को सूचित किया कि वह नई सरकार बना रहे हैं। येर लेपिड ने राष्ट्रपति से कहा है कि नयी सरकार में प्रधानमंत्री नेफ्टाली बेनेट होंगे। इजरायल की सत्ता में 12 साल तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू को अब प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। नई सरकार की शर्तों के अनुसार बेनेट सितंबर 2023 तक प्रधानमंत्री रहेंगे। उसके बाद लेपिड प्रधानमंत्री बनेंगे और नवंबर 2025 तक रहेंगे। यह समझौता पार्टी के नेता मंसूर अब्बास के साथ आने से हुआ है। इस गंठबंधन में इस्लामिक पार्टी सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बनी है। 120 सदस्यों वाली संसद में बेनेट के मात्र सात सांसद हैं। इजरायली संसद में सबसे बड़ी पार्टी नेतन्याहू की लिकुड पार्टी है। लिकुड पार्टी के 30 सांसद हैं। दूसरे नंबर पर येर लेपिड की येश एडिट पार्टी है। येश एटिड के पास 17 सांसद हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल के पास इतने सांसद नहीं है। स्पष्ट बहुमत के लिए दो वर्ष में चार चुनाव हो चुका है। बेनेट के समर्थन पर ही नेतन्याहू की सरकार टिकी थी। बेनेट किंगमेकर की भूमिका में हैं लेकिन अब किंग की कुर्सी के करीब पहुंच चुके हैं।

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यह हैं नेफ्टाली बेनेट
नेफ्टाली बेनेट अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो फिलिस्तीन के साथ तनातनी और बढ़ सकती है। बेनेट वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम को इजरायल में मिलाने के पक्षधर हैं। दोनों इलाका 1967 में मध्य-पूर्व के युद्ध के बाद से इजरायल के पास है। इसे अंतराष्ट्रीय समुदाय इजरायल का अवैध नियंत्रण मानता है। बेनेट नेतन्याहू से भी ज्यादा यहूदी राष्ट्रवाद के समर्थक हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि इजरायल एक यहूदी राष्ट्र है। इजरायल में अरब मूल के लोगों को वो दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं। बेनेट पू्र्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियां बसाने का जोरदार समर्थन करते हैं। फिलिस्तीन अतिवादियों को कठोर सजा देने के पक्ष में हैं। 49 साल के बेनेट प्रधानमंत्री नेतन्याहू के वफादार रहे हैं। बेनेट 2006 से 2008 तक इजरायल के चीफ ऑफ स्टाफ रहे थे। सेना में सेवा देने के बाद वे एक सफल कारोबारी भी बने हैं।

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इस्लामिक देशों से बढ़ेगी तनातनी
नेफ्टाली बेनेट के पास इजरायल की सत्ता आने के बाद मध्य-पूर्व के इस्लामिक देशों से तनातनी और बढ़ सकती है। 11 दिनों तक इजरायल हमास के बीच हिंसक संघर्ष हुआ तो इसमें इस्लामिक देशों की गोलबंदी हमास के साथ दिखी थी। तुर्की और पाकिस्तान, इजरायल के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर थे। बेनेट इजरायल से लगे फिलीस्तीन को अलग देश बनाने की मांग को खारिज करते हैं। ऐसे में अरब देशों के साथ भी तनाव बढ़ना लाजिमी है। ईरान को लेकर बेनेट काफी आक्रामक हैं। नेतन्याहू मंत्रिमंडल में भी बेनेट अर्थव्यवस्था और शिक्षा मंत्री रहे हैं। बेनेट मुक्त बाजार और अर्थव्यवस्था के घोर समर्थक हैं।

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