अबतक की सबसे बड़ी साइबर क्राइम, 13 लाख भारतीयों का डेटा हैक

आज हम आपको बताएंगे की कैसे होता है साइबर क्राइम, बताने का करण यह है कि लाखों भारतीय लोगों का डेटा साइबर क्राइम के द्वरा लूटी जा चुकी है. जी हां आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा. दरअसल सिंगापुर में एक ग्रुप ने इसकी जानकारी दी है. इस ग्रुप का नाम है आईबी सुरक्षा अनुसंधान. इस ग्रुप ने जानकारी दी है कि लाखो भारतीयों का डेटाबेस चोरी हो रहा है. लेकिन, इन्हे कुछ पता नहीं है.सिंगापुर में आईबी सुरक्षा अनुसंधान की टीम ने वेब पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड के विवरण के एक बड़े डेटाबेस का पता लगाया है. ‘INDIA-MIX-NEW-01’ के रूप में डब किए गए डेटा दो संस्करणों में उपलब्ध हैं. ट्रैक-1, औऱ ट्रैक-2 में 13 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं के भुगतान से जुडे पहचान शामिल हैं.

शुरुआती जांच में पता चला है कि सबसे ज्यादा ट्रैक-2 डेटा चोरी हुआ है. जो कार्ड के पीछे मैग्नेटिक स्ट्रिप में होता है. इसमें ट्रक मं ग्राहक की प्रफाइल और लेन-देन की सारी जानकारी होती है. इस ट्रक को हैक करने के बाद ग्राहक की पूरी जानकारी अपन पास हो जाती है. ट्रैक-1 डटा में सिर्फ कार्ड नंबर होता है जो की आम है. इसको चोरी करने से उन्हे कोई सफलता नहीं मिलेगी. लेकिन, ट्रैक-2 डेटा चोरी करने से ग्राहक की सारी चीजें चोरी की जा सकती हैं.सिंगापुर स्थित इस ग्रुप ने स्क्रीन-शॉट के साथ इस साइबर क्राइक बारे में बताया है. प्रत्येक कार्ड में 100 डॉलर ( लगभग 7,092 रुपये) में बेचा जा रहा है. इसका मतलब साफ है कि ये डेटाबेस आज से नहीं बल्की कई महीनों से चोरी हो रहे थे लेकिन, किसी को पता नहीं चला. इस डेटा को बेच कर क्राइमकर्ता भारी रकम कमा रहे हैं. ग्रुप-आईबी के शोधकर्ताओं ने बताया कि, जोकर्स स्टैश नामक एक डार्क वेब साइट ने भारत से 13 लाख से अधिक क्रेडिट और डेबिट कार्ड का डेटा डंप किया है. क्राइमकर्ता इस डेटा को डंप कर के पैसे कमाते थे.पहले जेडडीनेट द्वारा रिपोर्ट किया गया था, शोधकर्ताओं को इसका पता 28 अक्टूबर को चला था. शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सबसे बड़ा है और डार्क वेब पर अबतक किए गए सबसे मूल्यवान डेटाबेस अपलोड में से एक है. इस चोरी का खुलासा सिंगापुर स्थित आईबी सुरक्षा अनुसंधान ने किया है. ग्रुप-आईबी के सीईओ और संस्थापक इलिया सचकोव ने कहा कि, ‘इस क्षेत्र के डेटा अपलोड काफी दुर्लभ हैं, और इस घटना के बारे में अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और इसकी जांच भी की जा रही है. इसे भी पढ़ें:-चुनाव से पहले बड़ा घपला, 7.82 करोड़ लोगों का डेटा हुआ चोरी

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