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काबुल/ दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के साथ ही दुनिया पर आतंकियों की दहषत बढ़ गयी है। काबुल से दुनिया के अधिकांश देश अपने नागरिकों को वापस ले रहे हैं। दुनिया के कई देश और रक्षा विशेषज्ञ लगातार यह कहते रहे हैं कि तालिबान को पाकिस्तान का सहयोग मिलता रहा है। पाकिस्तान ही आतंकियों के सहारे अफगानियों से युद्ध लड़ रहा है। अफगानिस्तान सरकार ने भी कई बार कहा है कि पाकिस्तान, तालिबान के जरिए अफगानिस्तान से लड़ रहा है। अफगानिस्तान की पूर्व सरकार, अमेरिका और दुनिया के सामने पाकिस्तान के आतंकी रिश्ते अब लोगों के सामने आ चुके हैं। कई विषेशज्ञों ने पाकिस्तान को कई बार सलाह दी है कि तालिबान को समर्थन करने से पाकिस्तान को भी भविष्य में नुकसान संभव है। दुनिया की इस सलाह को पाकिस्तान नकारता रहा है। पाकिस्तान तालिबान को सपोर्ट करने के आरोप को सिरे से खारिज करता रहा है।

आधिकारिक बयानों में पाकिस्तान का कहना है कि वह अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है लेकिन अगर दुनिया में कहीं तालिबान की जीत का स्वागत हुआ है तो वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद ही है। तालिबान के साथ अब पाकिस्तान पुरी तरह से खड़ा है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने ‘गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने‘ के लिए अफगानों की तारीफ की है। इमरान खान के इस बयान से पूरी दुनिया नाराज है। अब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नेता मौलवी फकीर मुहम्मद ने तालिबान के इस्लामिक अमीरात के प्रति निष्ठा दिखाई है। उन्होंने कहा है कि वह पाकिस्तान में इसी तरह का इस्लामी शासन चाहते हैं। उनके इस बयान से पाकिस्तान की नींद उड़ चुकी है। तहरीक-ए-तालिबान द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में फकीर मुहम्मद ने कहा कि उनका लक्ष्य पाकिस्तान में इस्लामी शरिया सिस्टम लाना है। वह शरिया व्यवस्था लागू करेंगे।

अशरफ गनी सरकार ने सैकड़ों टीटीपी के लड़ाकों को अपने शासनकाल के दौरान जेल में बंद कर दिया था। इन लड़ाकों को अब तालिबान ने आजाद कर दिया है। टीटीपी के लड़ाके अब पाकिस्तान के खिलाफ काम करेंगे। रिहा होने वालों में टीटीपी के पूर्व उप प्रमुख मौलवी फकीर मोहम्मद भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि फकीर की रिहाई अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के लिए नया खतरा पैदा कर सकती है। मौलवी फकीर को फरवरी 2013 में नंगरहार में अफगान सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था।

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