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दिल्ली। तालिबान के लड़ाके हथियार के बल पर अफगानिस्तान पर कब्जा जमा चुके हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर जा चुके हैं। अब तालिबानियों के नेतृत्व को लेकर संशय बरकरार है। अब तालिबानी आतंकवादी खुद को और अधिक उदारवादी सांचे में ढालने की कोशिश कर रहे हैं। तालिबानी नेताओं का नया चेहरा भी सामने आया है, जिसमें वो अपने दुश्मनों के लिए माफी का वादा करना, विभिन्न जातीय समूहों के साथ एक समावेशी सरकार बनाने का वादा करना, आतंकवादी समूहों को अफगान धरती से दूर रखना और महिलाओं को शरिया कानून की सीमा के भीतर काम करने की अनुमति देना का वादा कर रहे हैं। इन वादों पर अफगानिस्तान की जनता और दुनिया विष्वास नहीं कर रही है। तालिबान के वरिष्ठ नेतृत्व में कई मुजाहिदीन लड़ाके शामिल हैं जिन्हें कभी शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने 1980 के दशक में हमलावर सोवियत संघ बलों के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रशिक्षित किया था। वर्तमान में तालिबान के कुछ नये चेहरे उभर कर आये हैं।

हैबतुल्लाह अखुंदजादा
1961 में जन्मे अखुंदजादा तालिबान का तीसरा सर्वोच्च कमांडर है। अमेरिका की ओर से 2016 के ड्रोन हमले में अपने कमांडर के मराने के बाद यह गद्दी मिली। अखुंदजादा की गिनती एक सैन्य कमांडर की तुलना में एक धार्मिक नेता के रूप में अधिक जाने जाते हैं। अखुंदजादा को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है और उनकी कुछ तस्वीरें उपलब्ध हैं। उनका आखिरी सार्वजनिक बयान मई में ईद अल-फितर को चिह्नित करने के लिए आया था।

अब्दुल गनी बरादर
तालिबान का उप नेता तालिबान का मुख्य सार्वजनिक चेहरा है जो संभवतः अगली सरकार का नेतृत्व करेगा। वह ओसामा बिन लादेन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था। मुल्ला मोहम्मद उमर के साथ तालिबान की सह-स्थापना की, जो समूह का पहला सर्वोच्च नेता था। बरादर को 2010 में यूएस इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त अभियान में कराची के पाकिस्तानी बंदरगाह शहर में पकड़ लिया गया था। जाल्मय खलीलजाद अफगानिस्तान के लिए अमेरिकी विशेष दूत ने कथित तौर पर ट्रम्प प्रशासन के साथ शांति वार्ता से पहले 2018 में उसकी रिहाई करने में मदद की। बरादार दोहा, कतर में रहता था, जहां तालिबान का एक राजनीतिक कार्यालय है।

सिराजुद्दीन हक्कानी
अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क का नेता, 2016 के आसपास समूहों के विलय के बाद दूसरा उप तालिबान नेता बन गया। माना जाता है कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के उसका आना जाना लगा रहता है।

मोहम्मद याकूब

याकूब तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का बेटा है। मोहम्मद याकूब समूह की शीर्ष पद के लिए एक दावेदार माना जाता था। उसने पड़ोसी पाकिस्तान के एक मदरसे में शिक्षा प्राप्त की थी और अब वह अफगानिस्तान में रहता है। माना जाता है कि वह सिराजुद्दीन हक्कानी के साथ समूह की सैन्य गतिविधियों की निगरानी करता था।

अब्दुल हकीम हक्कानी
अब्दुल हकीम हक्कानी की गिनती टॉप कमांडर अखुंदजादा का करीबी माना जाता है। हक्कानी तालिबान की वार्ता टीम का नेतृत्व करते हैं। वह धार्मिक विद्वानों की एक वरिष्ठ परिषद के प्रमुख भी हैं।

शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई
समूह के कई नेताओं के विपरीत, स्टानिकजई धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते हैं और जब अफगानिस्तान में आतंकवादियों ने सत्ता पर नियंत्रण किया था। तब उन्होंने उप विदेश मंत्री के रूप में बड़े पैमाने पर दुनिया की यात्रा की थी। 1996 में अब्बास ने क्लिंटन प्रशासन को तालिबान की सरकार को स्वीकार करने के लिए मनाने के लिए असफल मिशन पर वाशिंगटन का दौरा किया था।

जबीहुल्लाह मुजाहिद
मुजाहिद ने इस सप्ताह की शुरुआत में काबुल में तालिबान की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। समूह के संदेश को अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। 20 वर्षों के युद्ध के दौरान, उन्होंने पत्रकारों से केवल फोन पर या मैसेज के माध्यम से बातचीत किया। 17 अगस्त को मीडिया से बातचीत के दौरान पहली बार उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया था।

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