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नई दिल्ली। ताइवान ने चीन केा सख्त जवाब दिया है। शनिवार को कहा कि ताइवान एक स्वतंत्र राष्ट्र है न कि यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा। ताइवान की तरफ से चीन की उस टिप्पणी पर पलटवार करके जवाब दिया गया जिसमें चीन ने कहा था कि ताइवान और चीन का मुद्दा आपसी मामला है और चीन इस मुद्दे पर किसी भी तरह से बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार्य नहीं करेगा। चीन को करारा जवाब देते हुए ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता जेवियर चांग ने कहा कि ताइवान एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है। वह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि ताइवान देश का भविष्य ताइवान के हाथों में है। इसमें चीन की किसी भी तरह की दखल का जवाब सख्त से सख्त दिया जाएगा।

ताइवान की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से ताइवान के साथ संबंधों को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही गई है। चीन के शी जिनपिंग ने ताइवान को धमकाने की कोशिश की थी। चीन की तरह से यह भी कहा गया कि चीन ताइवान के मसले पर विदेशी हस्तक्षेप का कड़ाई से विरोध करेगा। शिन्हाई क्रांति की 110वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने संबोधन के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान मुद्दा विशेष रूप से चीन का आंतरिक मामला है। आंतरिक कहने का तात्पर्य चीन ताइवान को देश नहीं मानता है।

चीनी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चांग ने कहा कि 1911 की शिन्हाई क्रांति के बाद जो हुआ वह एक लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना थी, जिसमें चीनी गणराज्य का जिक्र था, न कि एक सत्तावादी तानाशाही का। हांगकांग की वर्तमान स्थिति साबित करती है कि चीन ने संरक्षित करने के अपने वादे को छोड़ दिया है। चीन दूसरे देशों में दखल देना बंद कर दे। प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान में मुख्यधारा की जनता की राय बहुत स्पष्ट है, ताइवान के लोग “एक देश, दो प्रणाली” को अस्वीकार करते हैं और अपने लोकतांत्रिक और जीवन के स्वतंत्र तरीके की रक्षा करेंगे। ताइवान के लोगों को अधिकार है कि वह स्वयं का जीवन तय करें।

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