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बेशर्म पाकिस्तान! संयुक्त राष्ट्र में भारत पर लगाए झूठे आरोप, तो भारतीय अधिकारी ने दिखाया आईना

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यूं तो पाकिस्तान हमेशा से ही अपने मन मुताबिक कहानियों को सुनाता आया है। पाक की आदत है कि, भारत की गतिविधियों पर पहले टांग अड़ाए और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ जहर उगले। इस बार भी पाक ने कुछ ऐसा ही किया है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के सत्र के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के नेतृत्व में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी मनगढ़ंत कहानी सुनाई। जिस पर जम्मू-कश्मीर के राजनयिक विमर्श आर्यन ने सभी आरोपों का बारी-बारी से खंडन किया। उन्होंने कहा ‘पाक के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि, धारा 370 भारत के संविधान का अस्थायी प्रावधान है। और इसमें बदलाव करना भारत का आपसी मामला और अधिकार है’। इस मामले पर पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है कि, वो भारत के मसलों पर दखलअंदाजी करे। इस दौरान राजनयिक विमर्श आर्यन ने ये भी कहा कि, वैसे तो हमें पाक के इन बयानों पर हैरानी नहीं है। पाकिस्तान का उद्देश्य इस मंच का राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण करना है। वो बोले अब, पाक को इस बात का अहसास हो रहा है कि, हमारा फैसला सीमापार आतंकवाद के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगा।’

UNHRC में पाक को दिखाया आईना
इस दौरान राजनयिक विमर्श आर्यन ने पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान का नाम लिए बगैर ही उनके बहुत से बयानों का जिक्र किया। वो बोले कि, पाक के कुछ नेताओं ने तो घाटी में हिंसा भड़काने की भी कोशिश की। जिसके लिए पाक की तरफ से जेहाद करने की मांग की गई, इसके लिए पाक ने ऐसी तस्वीरें दिखाईं जो सच्ची नहीं हैं। वो बोले, लोकतंत्र के मूल्यों को संरक्षित करने के लिए पाकिस्तान को कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए कश्मीर के लोग एक साथ हैं।

पाक के आरोपों को इन तर्कों से किया खंडन

1.भारत ने कहा कि, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाक ने जम्मू-कश्मीर के बारे में गलत और अपनी कहानी पेश की है। जबकि, भारत ने अपने संवैधानिक ढांचे के अनुरूप ही धारा 370 को लेकर फैसला लिया है।

2.भारत ने इस पर ये भी तर्क दिया कि, वो धारा 370 के मसले पर किसी भी तरह का विदेश हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा। क्योंकि, ये मामला भारत का आतंरिक है।

3.भारत ने ये भी तर्क दिया कि, पाक एक आतंकवाद केंद्र है, और वह वैकल्पिक कूटनीति के तौर पर सीमा पार आतंकवाद का संचालन करता है। जबकि, भारत मानवधिकारों को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने में ही विश्वास रखता है।

4.भारत ने कहा कि, जो देश आतंकवाद को समर्थन देता है, वास्तव में वही मानव अधिकारों के सबसे बड़े हननकर्ता हैं।

5.भारत की तरफ से कहा गया कि, पाक सिर्फ पीड़ित बनने का रोना रो रहा है। जबकि हकीकत तो ये है कि, पाक खुद ही मानवाधिकारों के हनन का अपराधी है। हमें उन लोगों पर लगाम कसनी चाहिए, जो मानवाधिकारों की आड़ में दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडों के लिए इस मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं।

6.धारा 370 पर संसद द्वारा पारित अन्य विधानों की तरह भारतीय संसद द्वारा बहस के बाद लिया गया। और सरकार के इस फैसले को व्यापक तौर पर भी समर्थन मिला। ये भी पढ़ेंः- UNHRC में पाकिस्तान की 2 मिनट में बोलती बंद, इन तर्कों से कश्मीर पर भारत ने दिया करारा जवाब

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