भारत की मिसाइल देखकर टेंशन में आया चीन, जिनपिंग को लगने लगा डर!

0
378

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को टीवी पर आ कर  ये ऐलान किया कि भारत ने ASAT परीक्षण के दौरान उपग्रह को मार गिराने में कामयाबी पाई है। इस परीक्षण में इससे पहले  रूस, अमेरिका और चीन ने ही ये उपलब्धि हासिल की है। इस परीक्षण सफलता पूर्वक करके भारत ने पूरी दुनिया को अपनी क्षमता दिखाई। अब भारत भी अंतरिक्ष की दुनिया में इस उपलब्धि के साथ यूएस, रूस और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है। जो अंतरिक्ष में अपने दुश्मन को निशाना बना कर खत्म कर सकता है।

भारत की मिसाइल देखकर चीन अब टेंशन में आ गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत द्वारा उपग्रह रोधी मिसाइल के सफल परीक्षण को लेकर कहा,‘‘हमने खबरें देखी हैं और उम्मीद करते हैं कि प्रत्येक देश बाहरी अंतरिक्ष में शांति बनाये रखेंगे’’। बता दें कि चीन ने ऐसा ही एक परीक्षण जनवरी 2007 में किया था जब उसके उपग्रह रोधी मिसाइल ने एक निष्क्रिय मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था।

बता दें कि चीन भी सैटेलाइट और अंतरिक्ष की दुनिया में तेजी से तरक्की कर रहा है और भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता है। दिसंबर 2018 में चीन ने हॉन्गयुन प्रोजेक्ट के तहत लो ऑर्बिट अर्थ सैटेलाइट लॉन्च किया था जिसके तहत चीन की 2025 तक 156 सैटेलाइट भेजने की योजना है। अगर ये परीक्षण सफल होता है तो चीन बड़े पैमाने पर पाकिस्तान समेत कई देशों को इंटरनेट, नैविगेशन और कम्युनिकेशन सर्विस मुहैया कराना चाहता है।

भारत ने अपने इस परीक्षण के माध्यम से चीन को सख्त संदेश दिया है कि अब भारत अंतरिक्ष में भी चीन का मुकाबला करने की क्षमता रखता है। भारत ने लो भारत ने लो ऑर्बिट में ASAT से सैटेलाइट को मार गिराया है। यह वही इलाका है जहां से पृथ्वी का सर्वेक्षण करने वाले अधिकतर सैटेलाइट काम करते हैं। इसमें नैविगेशन, जासूसी व अन्य सैटेलाइट भी शामिल होते हैं।

क्यों है ये मिशन खास?
भारत के वैज्ञानिकों के मुताबिक ये मिशन सफलतापूर्वक हुआ है। जो काफी अधिक मायने रखता है। वैज्ञानिक आरपी टंडन ने आजतक से मिशन के बारे में बात करते हुए कहा कि अब भारत दुश्मन पर जल, नभ और थल के साथ-साथ अंतरिक्ष से भी पूरी निगरानी कर सकता है। इसका मतलब ये है कि अगर देश का दुश्मन सैटेलाइट के माध्यम से भारत पर नजर रखता है तो भारत देश दुश्मन की मिसाइल को खत्म कर सकता है। ये मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि ये मिशन पूरी तरह मेक इन इंडिया है। और इसे इसरो और डीआरडीओ की मदद से पूरा किया गया है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here