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काबुल/ दिल्ली। अफगानिस्तान में जहां एक ओर तालिबान का कब्जा होता जा रहा है, वहीं तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों के हौसले भी बुलंद हैं। तालिबान सरकार बनाने की कोशिशों में जुटा है तो दूसरी ओर उसने अपना असली रंग भी दिखाना शुरू कर दिया है। तालिबान ने सलीमा मजारी को पकड़ लिया है। सलीमा अफगानिस्तान की पहली महिला गवर्नर हैं, जिन्होंने पिछले कुछ समय में तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद की है। सलीमा मजारी ने तालिबानियों से लड़ने के लिए हथियार उठाने का भी फैसला लिया था और अंतिम समय तक सलीमा तालिबान के खिलाफ लड़ती रहीं।

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ईरान में जन्मी सलीमा, तालिबान के खिलाफ लड़ीं
अफगानिस्तान से अशरफ गनी जैसे नेता देश छोड़कर भाग रहे थे। तब भी सलीमा मजारी अकेले ही अपने समर्थकों के साथ तालिबान के खिलाफ खड़ी थीं। अफगानिस्तान का बल्ख प्रांत जब तालिबान के कब्जे में आया, तब वहां के जिले चाहर में सलीमा मजारी तालिबान के पकड़ में आ गईं। उनके हौसले से तालिबान के खिलाफ लोगों को बल मिल रहा है। ज्ञात हो कि अफगानिस्तान में कुल तीन महिला गवर्नरों में से सलीमा पहली थीं। उनके इलाके चाहर में कुल 32 हजार से अधिक की आबादी है। सलीमा ने अंतिम वक्त तक तालिबान को अपने इलाके का कब्जा नहीं लेने दिया। तालिबान को यहां का कब्जा करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सलीमा मजारी का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन सोवियत वॉर के समय वो अफगानिस्तान में आई थीं। उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है लेकिन बाद में अफगानिस्तान के लिए उन्होंने राजनीति में आ गयीं। तालिबान का वह हमेशा विरोध करती रहीं। तालिबान से लड़ने के लिए बंदूक भी उठाई।

सरकार में महिलाओं को शामिल करने का तालिबानी वादा
तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा जमान के बाद अब सरकार बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। तालिबान ने ऐलान किया है कि उनके शासन में महिलाओं को आजादी मिलेगी। तालिबान ने कहा कि शरिया कानून के तहत ही होगा। इस बार तालिबान ने महिलाओं को सरकार में शामिल होने को भी कहा है लेकिन ऐसे वादों से इतर तालिबान द्वारा सलीमा मजारी को ही पकड़ लिया गया है।

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