Salima mazari

काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान ने भले ही हथियार के बल पर कब्जा कर लिया हो लेकिन उसके लिए सत्ता का रास्ता बहुत ही कठिन है। अफगानिस्तान के अलग-अलग मोड़ पर उसका मुकाबला करने के लिए हमेशा कोई ना कोई तैयार ही रहा है। इन्हीं में से एक थीं अफगानिस्तान के एक प्रांत की महिला गवर्नर सलीमा मजारी। जोश और जज्बे से भरी सलीमा मजारी अफगानिस्तान से निकल चुकी हैं। बीच में खबर आई थी कि सलीमा मजारी को तालिबान ने पकड़ लिया है। बाद में उनके मारे जाने की भी अफवाह उड़ी थी। इन तमाम कयासों से दूर सलीमा मजारी एकदम सुरक्षित हैं। 39 साल की सलीमा मजारी वर्तमान में अमेरिका में सुरक्षित जगह में हैं, जो तालिबान को मात देकर वहां पर पहुंची हैं। सलीमा मजारी लंबे समय तक तालिबान की हिटलिस्ट में शामिल रहीं हैं। चाहर में सलीमा मजारी ने तालिबान का लंबे समय तक मुकाबला किया।

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अफगानिस्तान से ऐसे निकली सलीमा

अमेरिका में टाइम मैग्जीन को दिए साक्षात्कार में सलीमा मजारी ने बताया है कि तालिबान ने चारकिंत जिले में 30 से ज्यादा बार हमला किया था। तालिबान कामयाब नहीं हो पाया था। उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद ही काबुल और मजार-ए-शरीफ पर उसका कब्जा हो गया था। ज्ञात हो कि सलीमा मजारी साल 2018 में इस इलाके की गवर्नर बनी थीं। वह शुरू से ही सरकार की समर्थक रहीं और तालिबान का विरोध करती रहीं है। तालिबान ने कई बार उनपर हमला किया लेकिन उन्होंने तालिबान का मुकाबला किया और जरूरत पड़ने पर बंदूक भी उठाई। वह तालिबान की कट्टर विरोधी हैं।

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उन्होंने बताया कि जब तालिबान ने मजार ए शरीफ पर कब्जा किया और वो चारकिंत की ओर बढ़ने लगा। तब सलीमा मजारी अपने समर्थकों के साथ उजबेकिस्तान के बॉर्डर पर पहुंचीं ताकि वहां से निकल सके। बॉर्डर से निकलने में उन्हें कामयाबी नहीं मिलीं। इसके बाद वो कुछ जगह रुकीं और किसी तरह काबुल के एयरपोर्ट तक पहुंची। उन्होंने बताया कि इस दौरान कई बार बीच में तालिबान के लड़ाके भी मिले लेकिन वह किसी तरह बचकर उनसे निकल पाईं। अंत में 25 अगस्त को सलीमा मजारी काबुल से निकल पाईं। यहां से वो अमेरिकी सेना की फ्लाइट में कतर पहुंचीं और उसके बाद अब अमेरिका में एक सुरक्षित स्थान पर हैं। सलीमा मजारी का कहना है कि तालिबान के खिलाफ उनकी लड़ाई अभी भी जारी है।

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