निंदा प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने पर रूस ने भारत को दिया धन्यवाद, ऐसी रही कूटनीति

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नई दिल्ली। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने के लिए भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात को धन्यवाद दिया है। यूनाइटेड नेशंस में रूसी राजदूत वसीली नेबेंजिया ने धन्यवाद देते हुए कहा है कि हम उन लोगों को आभारी हैं जिन्होंने इस मसौदे का समर्थन नहीं किया। यूक्रेन पर हमले के पर रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाया गया था। रूस ने निंदा प्रस्ताव पर वीटो कर दिया। भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने मतदान करने से परहेज किया है। निंदा प्रस्ताव का 11 देशों ने समर्थन किया था। परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में रूस की वीटो शक्ति के कारण निंदा प्रस्ताव पास नहीं हो सका। यह रूस की कूटनीतिक जीत है।

रूस यूक्रेनी लोगों को वीटो नहीं कर सकता

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने मतदान के बाद सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं एक बात साफ कर दूं। रूस इस प्रस्ताव को वीटो कर सकता है लेकिन हमारी आवाज को वीटो नहीं कर सकता है। सचाई को वीटो नहीं कर सकता है। हमारे सिद्धांतों को वीटो नहीं कर सकता है। यूक्रेनी लोगों को वीटो नहीं कर सकता है। उन्होंने यूक्रेन के मानवीयता और संवेदनशीलता का चर्चा किया।
ज्ञात हो कि भारत ने प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया है। भारत ने कहा कि हमें सभी की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करना चाहिए।

ऐसी है भारत की नीति

वोटिंग से दूर रहने के पीछे भारत की रणनीति, कूटनीति का भी हिस्सा है। रूस और अमेरिका से बेहतर संबंध को देखते हुए भारत चाहे तो मॉस्को और वाशिंगटन और बातचीत के लिए एक जगह बैठा सकता है। दोनों देशों से करीबी रिश्ता होने की स्थिति में भारत की जरूरत दुनिया के सामने बढ़ गयी है। इसके साथ ही भारत सीधे-सीधे किसी एक पक्ष को यूक्रेन मसले पर सपोर्ट करने से बचता रहा है क्योंकि भारत के दोनों पक्षों से बेहतर संबंध हैं। यूक्रेन ने कई बार भारत से अपील की है कि वह रूस से बातचीत कर रूसी आक्रमण को रोके की पहल करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की। पीएम मोदी ने रूस से कूटनीति और बातचीत के माध्यम से स्थिति को हल करने की अपील की है।

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