घोर संकट से जूझ रहा पाक, लग सकता है 6 अरब डॉलर का बड़ा झटका

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 यूपी। पाक जिस तरह से दूसरे देशों को भारत  के खिलाफ भड़काने की रणनीति बना रहा था जिससे विदेशी मुलक भारत के खिलाफ खड़े होकर धारा 370 को हटाए जाने का विरोध कर सके। लेकिन पाक की ये मंशा भी नाकाम हो गई जबकि पाक को उसी की कुटरणनीति उसी पर उल्टी पड़ गई। जिसके चलते पाक को सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार नए संकटों का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, पाक की इस वित्तीय वर्ष में बजट घाटा पिछले आठ सालों में सबसे अधिक हुआ है। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से स्वीकृत हुए 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर भी खतरा मंडरा सकता है। इसे भी पढ़ें : पाकिस्तान की भारत को गीदड़भभकी, कहा ‘हम युद्ध के लिए तैयार’

खरी नहीं उतरी इमरान की सरकार 
बता दें कि आईएमएफ कुछ दिन बाद ही बेलआउट पैकेज के लिए पहली बार समीक्षा करने जा रहा है। जिसके चलते पाक को आए दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आईएमएफ ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम कड़ी शर्तें रखी थीं, लेकिन फिलहाल किसी भी शर्त पर इमरान की सरकार खरी उतरती नजर नहीं आ रही है।

पाक की पिछले साल के मुकाबले इस साल जीडीपी 8.9 बढ़ी
हालांकी पाक के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान का बजट घाटा देश के कुल घरेलू उत्पाद का 8.9 फीसदी (3.45 ट्रिलियन रुपए) तक पहुंच गया है जबकि पिछले साल यह 6.6 फीसदी था। इमरान खान की सरकार की नाकामी का यह एक बड़ा सबूत है, क्योंकि सरकार ने खुद बजट घाटा जीडीपी का 5.6 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था।

पाक के वित्त मंत्रालय का मानना है कि सरकार का बजट घाटा तय लक्ष्य से 82 फीसदी बढ़ गया है। भारी-भरकम बजट घाटे की वजह से 2019-20 का बजट दो महीने के भीतर ही अपनी अहमियत खो चुका है। इसे भी पढ़ें:मोदी-ट्रंप की मुलाकात के बाद पाकिस्तान का टूटा कश्मीर सपना, देखें वीडियो

ऐसे में पाक अपने खर्चे को लगातार बढ़ाता जा रहा है,तो दूसरी तरफ उसकी आय (राजस्व) में गिरावट जारी है। पाकिस्तान ने जुलाई महीने में शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में सरकारी राजस्व 40 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। अगर पाकिस्तान की सरकार राजस्व का लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती है तो इससे आईएमएफ का 6 अरब डॉलर का पैकेज खतरे में पड़ सकता है

पाक में 20 फीसदी की कमी के चलते आई मंदी
दरअसल, कराची में आरिफ हबीब लिमिटेड में डायरेक्टर रिसर्च समीउल्लाह तारिक का कहना है कि यह एक असंभव लक्ष्य है। अगर वे इस तिमाही में आईएमएफ के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाते हैं तो टैक्स बढ़ाने के लिए एक नया मिनी बजट लाया जा सकता है ताकि आईएमएफ के रीव्यू में पास हुआ जा सके। तारिक के मुताबिक, पिछली तिमाही में गैर-कर राजस्व में 98 फीसदी की गिरावट की वजह से कुल राजस्व में 20 फीसदी की कमी आई है। इसे भी पढ़ें: भारत का ही नहीं, अफगानिस्तान का भी दुश्मन बन रहा पाक, भारी गोलाबारी से दुखी, यूएन का लिया सहारा  

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के फिजूलखर्ची रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार अपने खर्च को कम करने और राजस्व बढ़ाने में नाकाम रही है। यहां तक कि सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें भी बढ़ा दी थीं।

इमरान खान ने यह भी कहा था कि लोग टैक्स भर रहे हैं, इसका मतलब कि उन्हें सरकार में भरोसा है। लेकिन अब इन आंकड़ों को देखकर यही लगता है कि जनता को इमरान सरकार में बिल्कुल भरोसा नहीं रह गया है। इसे भी पढ़ें:  ‘पाक आर्मी ने हजारों लोगों को मौत के घाट उतारा’ बड़ा खुलासा

रक्षा बजट पर हुआ पाक का 3.23 ट्रिलियन खर्च
गौरतलब है कि इमरान की सरकार ने पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा खर्च किया था मगर राजस्व में इस साल 6 फीसदी की गिरावट आई है। पाक वित्त मंत्रालय के मुताबिक, कर्ज और रक्षा बजट पर ही 3.23 ट्रिलियन खर्च हुआ जो सरकारी राजस्व का कुल 80 फीसदी है।

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