Friday, December 3, 2021

महमूद गजनवी की कब्र पर पहुंच कर Anas Haqqani ने गर्व से किया सोमनाथ मंदिर तोड़ने का जिक्र

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जब से अफगानिस्तान की सत्ता तालिबान के हाथ आई तब से हाल बेहाल हैं. तालिबान को आए अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं कि उसने अपना रंग दिखाना और भारत के खिलाफ अपने गलत मंसूबों को सामने लाना शुरू कर दिया है। तालिबान सरकार में सम्मिलित और हक्कानी नेटवर्क का सरगना अनस हक्कानी मंगलवार को भारत पर 17 बार हमला करने वाले महमूद गजनवी की कब्र पर पहुंच गया और फिर उसने भारत विरोधी कई सारी बातें कहीं। पाकिस्तान के इस बंदे ने अपने ट्वीट में सोमनाथ मंदिर गिराए जाने और मूर्तियां तोड़े जाने बड़े रौब के साथ जिक्र भी किया है।

किया सोमनाथ मंदिर तोड़ने का जिक्र

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अनस ने इस ट्वीट में बोला है कि ‘हम 10वीं सदी के मुस्लिम योद्धा एवं मुजाहिद सुल्ताम महमूद गजनवी की कब्र पर गए। गजनवी ने गजनी से क्षेत्र में एक मजबूत मुस्लिम शासन की नीव रखी और सोमनाथ की मूर्ति को तोड़ा।’

इसके पहले भी एक इंटरव्यू में हक्कानी भारत के विरोध में अपने मंसूबो को बता चुका है। अनस ने हाल के ही एक इंटरव्यू में कहा था कि अफगानिस्तान, भारत का सच्चा दोस्त नहीं है। इस इंटरव्यू में उसने भारत सरकार और भारतीय मीडिया की कड़ी आलोचना भी की।

उसने ये भी बोला था कि भारत को अफगानिस्तान को लेकर अपनी नीति में चेंजेस करने की जरूरत है। इसी के साथ ही उसने तालिबान के शीर्ष नेतृत्व में किसी तरह की अनबन एवं गुटबाजी होने से मना किया। अनस ने बोला था कि तालिबान नेतृत्व में कोई भी मतभेद नहीं है। उसने ये आरोप लगाया कि अशरफ गनी सरकार से जुड़े लोग तालिबान नेतृत्व को लेकर ऐसी बातें फैला रहे हैं।

भारतीय मीडिया करता है ये काम

भारत के साथ अफगानिस्तान के रिलेशन पर उसने कहा कि यह बहुत बुरा है कि नई दिल्ली का रुख पूर्वाग्रह से युक्त हो गया है। पाकिस्तान के इस बंदे ने आरोप लगाया कि भारत ने बीते 20 सालों में भारत ने हालात बिगाड़ने में सहायता की है। उसने भारतीय मीडिया पर तालिबान की गलत छवि दिखाने के आरोप लगाये हैं। अनस ने बोला कि अफगानिस्तान के प्रति भारत को अपनी नीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है। अभी तक शांति के लिए भारत ने कुछ नहीं किया है।

तालिबान सरकार में हो सकती है गुटबाजी

इसी बीच, अफगानिस्‍तान में तालिबान नेतृत्व में गुटबाजी एवं रिश्ते बिगड़ने की खबरें आ रही हैं। खबरों के बारे में बात करें तो सरकार में अहम पदों को लेकर हक्‍कानी नेटवर्क और तालिबान के बीच मतभेद पैदा शुरु हो गये हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि तालिबान के टॉप लीड‍रशिप में अनबन की इन खबरों के बीच पाकिस्‍तान और कतर ने यहां अपने ‘दूत’ भेजे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार के महत्‍वपूर्ण मंत्रालयों और शीर्ष पदों को हक्‍कानी नेटवर्क और कंधार के तालिबान समूह को दिए जाने पर गुटबाजी और भी तेज हो चुकी है।

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