Friday, December 3, 2021

अब TALIBAN को समझाएंगे तुर्की और इंडोनेशिया, महिला अधिकार और शिक्षा पर होगी बात

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दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान का हथियार के बल पर कब्जा होने के साथ ही बड़े-बड़े वादे किये गये थे लेकिन तालिबान अपने वादे पर खरा नहीं उतरा। लोगों की सुरक्षा, महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन, बेहतर अर्थव्यवस्था और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे वादे से तालिबान यू-टर्न ले चुका है। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था के हालात तो बदतर हैं ही, महिलाओं से काम करने की आजादी छिन गई है। महिलाओं की शिक्षा को लेकर भी तालिबान किसी तरह का ठोस फैसला नहीं कर पाया है। अब कई इस्लामिक देश इस मामले को लेकर सक्रिय हुए हैं।

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द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार कई मुस्लिम देशों के विदेश मंत्री काबुल जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। ये सभी लोग तालिबान को इस बात का एहसास दिलाना चाहते हैं कि महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा से वंचित करना इस्लाम के खिलाफ है। इस प्रस्ताव को लेकर पश्चिमी देशों के राजनयिकों ने भी समर्थन दिया है। पश्चिमी देशों के बजाय अगर इस्लामिक देशों के प्रतिनिधि तालिबान से गुजारिश करते हैं तो उनके अनुरोध पर तालिबान के गौर फरमाने की संभावना काफी अधिक है। गौरतलब है कि तुर्की और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों के काबुल जाने की सबसे ज्यादा संभावना है। तुर्की के विदेश मंत्री और इंडोनेशिया की विदेश मंत्री रेटनो मार्सुदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी साथ की है। उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान के हालातों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम काबुल जाने की योजना तैयार कर रहे हैं। आने वाले समय में कुछ और देशों के विदेश मंत्री भी हमारे साथ जुड़ सकते हैं।

‘इंडोनेशिया की महिला विदेश मंत्री हो सकती हैं तो अफगानिस्तान की लड़कियां क्यों नहीं‘

इस मामले में एक डिप्लोमैट का कहना था कि अफगानिस्तान पहुंचकर कहीं ना कहीं इस आइडिया पर भी काम किया जाएगा कि इंडोनेशिया की विदेश मंत्री जो एक महिला हैं। तालिबान के सामने जाकर एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकती हैं। तालिबान मानता है कि महिलाएं बाहर काम करने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें घर पर रहना चाहिए। वे मासुर्दी को देख सकते हैं कि कैसे वे एक इस्लामिक देश में होने के बावजूद विदेश मंत्री बनने में सफल रही हैं और अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। यहां आइडिया तालिबान को लेक्चर देना नहीं बल्कि उन्हें उदाहरण के सहारे पावरफुल संदेश देना है।

‘जो मुस्लिम अपनी लड़कियों को पढ़ाता है, उसे जन्नत मिलती है‘

इंटरनेशनल कोर्ट चीफ अभियोजक करीम खान ने दोहा में ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम के दौरान कहा था कि तालिबान को समझना चाहिए कि वे इस्लाम के अत्यधिक कठोर रूप को फॉलो करने की कोशिश कर रहे हैं। इस्लाम के पवित्र पैगंबर ने बहुत साफ तौर पर कहा है कि जो व्यक्ति अपनी बेटियों को शिक्षित करेगा वो जन्नत में जाएगा। मुस्लिमों को आयशा से सीखना चाहिए। इस्लाम का धर्म उन लोगों के खिलाफ है जो कहते हैं कि महिलाओं को शिक्षित नहीं किया जाना चाहिए। उन लोगों के भी खिलाफ है जो महिलाओं को सिर्फ उनके जेंडर की वजह से टारगेट करते हैं और उनका उत्पीड़न करते हैं। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और अधिकार की बातें की हैं।

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