मंगल ग्रह पर आज उतरेगा नासा का मार्स रोवर पर्सिवेरेंस, जानिए क्यों होंगे सात मिनट अहम

NASA

मंगल पर जीवन की संभावना तलाशने के लिए नासा द्वारा भेजे गए मार्स रोवर पर्सिवेरेंस ने अपनी सात महीने की यात्रा (47 करोड़ किमी) लगभग-लगभग पूरी कर ली है। गुरुवार की रात और शुक्रवार की सुबह एक बड़ी घटना होने जा रही है। जब भारतीय समय के अनुसार रात के 2.25 पर नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) मंगल (Mars) के जजीरो क्रेटर पर उतरेगा, तब उसके सामने कुछ बड़ी चुनौतियां होंगी। ऐसा नहीं है कि मंगल पर पहली बार इस प्रकार का कोई रोवर उतर रहा है। यही वजह है की सभी लोग इसके लिए काफी आशान्वित हैं, मगर यह प्रक्रिया आसान नहीं है। क्योंकि यह प्रक्रिया चंद्रमा पर यान उतरने की प्रक्रिया से भी कहीं अधिक जटिल है।

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मिशन प्रबंधकों की तरफ से मंगलवार को दी गई जानकारी के अनुसार, पर्सिवेरेंस की यात्रा के 5.96 लाख किमी बाकी रह गए थे और वह गुरुवार को जेजीरो क्रेटर पर लैंड करने के निर्धारित पथ पर आगे बढ़ रहा था। जेजीरो क्रेटर वह स्थान है जहां कभी झील और नदी डेल्टा हुआ करता था। इस मिशन में 2.7 अरब डालर लगें हैं। इसका मकसद इस बात के साक्ष्य जुटाना है कि लगभग तीन अरब साल पहले शायद मंगल पर सूक्ष्म जीव पनपे हों जब यह ग्रह अधिक गर्म, नम और संभवत: जीवन के अधिक अनुकूल था।

इससे पहले नासा ने चार मोबाइल साइंस व्हीकल मंगल पर भेजे थे, मगर पर्सिवेरेंस अधिक बड़ा और परिष्कृत है। पर्सिवेरेंस को मंगल की चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाने के लिहाज से डिजाइन किया गया है। अभी तक ये पहली बार होगा कि जब किसी अन्य ग्रह से ऐसे नमूनों को इकठ्ठा किया जाएगा। इसमें मंगल के प्रवेश कराने की जिम्मेदारी पर्सिवियरेंस की मार्स एंट्री, डिसेंट एंड लैंडिंग इंस्ट्रयूमेंटेशन 2 (MEDLI2) पर है। MEDLI2 में तीन प्रकार के सेंसर्स जो इस दौरान तापमान, ऊष्मा और दबाव की सूचना रखेंगे और यह प्रक्रिया पैराशूट खुलने के दौरान और उसके बाद भी जारी रहेगी। इसमें 28 सेंसर्स को खास सिलसिले में ही लगाया गया है।

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