4 भारतीय एस्ट्रोनॉट को ट्रेनिंग दे रहा रूस, इस मिशन के लिए अंतरिक्ष भेजने की कर रहा तैयारी

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रूस और भारत की दोस्ती पूरी दुनिया के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। दोनों देश हमेशा से एक दूसरे का सहयोग करते रहे आए हैं। चाहे वह रक्षा क्षेत्र की बात हो, या फिर अन्य विषयों पर। रूस हमेशा से भारत की मदद के लिए आगे रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण हाल ही में रूस में हुए एससीओ सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जितनी तवज्जो दी गई उतनी चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंगही को नहीं मिली। इतना ही नहीं जिस तरह से रूस में राजनाथ सिंह का स्वागत किया गया, चारों और सैन्य अधिकारी तैनात दिखे। इसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही सम्मान बताया जा रहा है। यानि की रूस की दोस्ती भारत के लिए कितनी अहम है इस कार्यक्रम से पता लगाया जा सकता है। बरहाल इस बीच रूस भारत के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को तैयार कर रहा है. इसके लिए रूस के गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में चारों भारतीयों को बेहतरीन ट्रेनिंग दी जा रही है।

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रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉस्मस के बयान के मुताबिक, अंतरिक्ष की उड़ान के लिए जरूरी तमाम स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल की गई हैं. इसमें रूसी भाषा सीखने समेत रूसी सोयूज वीकल के हर पहलू का अध्ययन भी शामिल है।

सूत्रों के अनुसार अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के कई कई तरीके सिखाए जा चुके हैं। इसके साथ अंतरिक्ष यात्रियों को बिना ग्रैविटी वाले वातावरण में भी रहना सिखाया जा रहा है।

(ISRO) के मुताबिक, गगनयान प्रोजेक्ट के तहत, भारत साल 2022 में स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ से पहले अपने एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष भेजेगा।

रूस और भारत ने चारों एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसरो के मुताबिक, गगनयान मिशन के पहले क्रू में तीन एस्ट्रोनॉट्स शामिल होंगे और वे सात दिनों तक अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे।

कहा जा रहा है ये चारों भारतीय पायलट ट्रेनिंग के लिए फरवरी महीने में रूस पहुंचे थे और साल 2021 की शुरुआत में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लेंगे।

वहीं देश का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन मोदी सरकार की बेहद खास परियोजनाओं में से एक बताया जा रहा है. इसकी लागत करीब 10,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

मालूम हो कि आज तक सिर्फ दो भारतीयों ने अंतरिक्ष की उड़ान भरी है लेकिन ये उड़ान रूस के सोयूज कैप्सूल और अमेरिकी स्पेस शटल के जरिए पूरी की गई थी। इसमें देश के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा थे जिन्होंने साल 1984 में

रूस के सोयूज टी-11 में बैठकर अंतरिक्ष यात्रा की. हालांकि, गगनयान मिशन में भारतीय वेहिकल का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

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