पैंगोंग में चीनीयों को खदेड़ा तो बौखला उठा ड्रैगन! बोला ‘1962 की तरह तबाह होगा भारत’

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भारत और चीन के बीच पिछले तीन महीने से लद्दाख सीमा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है, दोनों देशों में युद्ध जैसे माहौल बनते दिखाई पड़ रहे हैं। हाल ही में चीन की तरफ से 29-30 अगस्त की रात सीमा पार के इलाकों में चीनी घुसपैठियों की खबर सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार चीन ने अपने 500 सैनिकों को पैंगोंग झील के पास के इलाकों में भेजा था, लेकिन भारतीय सेना सीमा पर नजरें गड़ाए बैठी हुई थी. चीनीयों को सीमा से ही सेना ने खदेड़ किया। जिससे चीन की बौखलाहट और ज्यादा बढ़ती दिखाई पड़ रही है। दरअसल चीनी मीडिया ने इस घटना पर भारत के खिलाफ जहर उगला है। चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक संपादकीय में कहा है कि अगर भारत उसके साथ किसी तरह की प्रतिस्पर्धा में शामिल होना चाहता है तो चीन अतीत से ज्यादा उसकी सेना को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है। इतना ही नहीं चीनी मीडिया ने ये भी कहा कि भारत को चीन की ताकत भूलनी नहीं चाहिए, अगर अब भी कुछ बताने की जरूरत है तो 1962 के इतिहास पर गौर फरमाएं।

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ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा, पिछले महीने पैंगोंग लेक में हुआ संघर्ष दिखाता है कि भारत ने गलवान घाटी से कोई सबक नहीं लिया. इसलिए चीन को बार-बार उकसाया जा रहा है। लेकिन भारत यह भूल रहा है कि चीन की आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी है। अगर युद्ध जैसे माहौल बनते भी हैं तब भी चीन भारत पर भारी पड़ेगा। इसलिए युद्ध का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया जाए तो बेहतर होगा।

चीनी मीडिया ने कहा कि 2017 में डोकलाम के बाद से भारत-चीन सीमा पर तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं. चीन-भारत सीमा पर विवाद लंबा खिंच सकता है और कई तरह के छोटे-बड़े संकट सामान्य बात हो जाएगी. हमें इसके लिए तैयार होना चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, चीन भारत से कई गुना ज्यादा ताकतवर है और भारत का चीन से कोई मुकाबला ही नहीं है.

चीनी मीडिया के कहा, एशिया और दुनिया के इतिहास ने हमें बताया है कि अवसरवाद पर चलने वाली ताकतें कमजोर को परेशान करती हैं जबकि ताकतवर से डरती हैं. जब भारत-चीन सीमा की बात आती है तो भारत पूरी तरह से अवसरवादी है।

इसके साथ ही चीन ने अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा कि, अगर भारत इस गलतफहमी है कि अमेरिका और अन्य देश उसके साथ खड़े होंगे, तो इस गलतफहमी को निकाल दें। चूंकि भारत-चीन विवाद दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है इसमें बाहरी देश कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

चीनी मीडिया ने कहा, चीन दक्षिण-पश्चिम सीमाई इलाकों में रणनीतिक रूप से मजबूत है और किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. अगर भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहता है तो इसका स्वागत है। लेकिन अगर भारत चीन को यूं उकसाएगा तो अंजाम बुरा भी हो सकता है। भारत के मुकाबले चीन के पास ज्यादा हथियार और क्षमता है, पीएलए भारतीय सेना को 1962 से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा , चीन-भारत सीमाई इलाके में सैन्य संघर्ष के लिए चीन को तैयार रहना चाहिए. हमें शांतिपूर्ण तरीकों से अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन अगर भारत लगातार चीन को ललकारना जारी रखता है तो चीन को भी नरम रुख नहीं अपनाना चाहिए.

भारत की तरफ से लगातार अगर ललकारा जाएगा तो जरूरत पड़ने पर चीन को सैन्य कार्रवाई का कदम उठाना चाहिए, और सुनिश्चित करना चाहिए कि वो इस परिस्थिति में सफल भी हो।

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