Thursday, January 28, 2021
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अमेरिका को हर तरफ से घेरने के लिए चीन ने चली शातिराना चाल, अब यहां बना रहा मिलिट्री बेस!

पूरी दुनिया को कोरोना वायरस की दलदल में धकेलने वाला चीन अब अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने में लगा है. एक तरफ जहां पूरा विश्व इस महामारी की तबाही को झेल रहा है और इससे निजात पाने की कोशिश में लगा है तो वहीं दूसरी तरफ इस वायरस में दुनिया के ध्यान भटकने का फायदा उठाकर चीन अपनी शातिराना चालों को कामयाब करने की कोशिश में लगा है. दरअसल इस समय प्रशांत महासागर को लेकर भी चीन अपनी नई रणनीति का दांव खेलते हुए किरिबाती में अपनी एम्बेसी बनाने की तैयारी को शुरू कर दिया है. जी हां यहां पर चीन ने एम्बेसी को शुरू करने के लिए वायरस के खत्म होने का भी इंतजार नहीं किया.

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दरअसल अब इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन की ओर से जल्द ही यहां पर चीनी सेना नेवल बेस बना सकती है. बता दें कि हाल ही में हुए किरिबाती में राष्ट्रपति के चुनाव में एक बार फिर टेनेटी ममाउ को जीत हासिल हुई है. आपको ये बात अजीब लग सकती है कि राष्ट्रपति टेनेटी ममाउ चीन के समर्थक रहे हैं. जानकारी के मुताबिक पेइचिंग यात्रा के समय ही राष्ट्रपति टेनेटी ममाउ और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एम्बेसी को खोलने की बात पर सहमति बनी थी. फिलहाल कुछ रिपोर्ट के हवाले से ये जानकारी मिली है कि 1.16 लाख की आबादी वाले इस देश को चीन ने अरबों डॉलर का कर्ज भी दिया है. जिसकी जाल में चीन सिर्फ इसी देश को नहीं बल्कि अपने कई पड़ोसी मुल्कों को भी फंसा चुका है. ये चीन का नया पैंतरा है, जिसके जरिए वो और देशों पर अपना दबदबा बढ़ा रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस और साउथ चाइना सी को लेकर अमेरिका-चीन के बीच भी तनाव जारी है. यहां तक कि अमेरिका की ओर से कई बार ये बयान भी दिया गया है कि वो चीन के हर चाल का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एशिया में अपनी सेना की संख्या को और बढ़ा रहे हैं. America-Australiaऐसे में यदि चीन और अमेरिका के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो प्रशांत महासागर में अमेरिका के सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. शायद यही वजह है कि अमेरिका को पहले ही चारों तरफ से घेरने के लिए चीन प्रशांत महासागर में अपना दबदबा बढ़ा रहा है.

इसके अलावा जिस तरीके से कहा जा रहा है कि चीन किरिबाती में अपना नेवल बेस बना सकता है. यदि ये संभव हो गया तो ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच की भी दूरियां-कड़वाहट और बढ़ जाएगी. जो अभी देखा जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया में कोरोना के फैलने का जिम्मेदार चीन को ही माना जा रहा है. यहां तक कि किरिबाती की सभी जरूरत से जुड़ी चीजों को ऑस्ट्रेलिया ही पूरा करता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच चल रहे विवाद का मामला अभी सुलझा नहीं है. और तो और चीन ने ऑस्ट्रेलिया से आयात किए जाने वाले कई सामानों पर प्रतिबंध भी लगा दिया है. यहां तक कि चीन के हैकरों ने ऑस्ट्रेलिया के कई वेबसाइट्स को अपना निशाना भी बनाया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन ने अपने देश के नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया यात्रा पर न जाने की एडवाइजरी भी जारी की है.

बताया जा रहा है कि प्रशांत महासागर में बसे इस छोटे से देश में अपना सिक्का जमाने के लिए चीन आज से नहीं बल्कि साल 2006 से ही प्रयास कर रहा है. बता दें कि इसी साल तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति वेन जियाबाओ ने किरिबाती द्वीपीय देश की यात्रा की थी. यहां तक कि कोरोना वायरस महामारी के हालात में भी चीन ने यहां पर डोनेशन डिप्लोमेसी पैतरें के जरिए फायदा उठाने की भी कोशिश की है. इस समय भारी मात्रा में चीन इस देश को मास्क, पीपीई किट, दवाईयां और सर्जिकल मास्क सप्लाई कर रहा है.

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