Monday, January 18, 2021
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भ्रष्टाचार, स्कैंडल के कारण पाकिस्तान की परियोजना से पीछे हटने लगा है चीन

दिल्ली। चीन और पाकिस्तान की दोस्ती बस दूसरों को दिखाने के लिए है। जब भी चीन के स्वार्थों की बात आती है तो पाकिस्तान ठगा हुआ साबित होता है। इस बार ऐसा ही हुआ है। चीन पाकिस्तान को जोर का झटका देने की तैयारी में है। पाकिस्तान में लगातार सामने आ रहे घोटालों, बढ़ रहे ऋण और सुरक्षा के कारण से बढ़ रही लागत की वजह से ड्रैगन ने अरबों की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है। बीआरआई से चीन के पीछे हटने से पाकिस्तान में चल रही परियोजनाये बंद हो जाएंगी। चीन ने बहुत तेजी से अपने खर्चों में कटौती की है। चाइना पाकिस्तान इकोनाॅमिक कोरिडोर के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब या तो ठप हो गए हैं या तय समय से पीछे चल रहे हैं। 122 परियोजनाओं में से केवल 32 इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही तक पूरी हुई हैं। न केवल पाकिस्तान, अन्य देशों के लिए भी चीन के उधार में पिछले कुछ वर्षों में काफी गिरावट देखी गई है। चीन के इस रवैये से पाकिस्तान पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है। बोस्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य समर्थित चीन डेवलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना द्वारा 2016 में कुल ऋण 75 अरब डॉलर से घटकर पिछले साल केवल 4 बिलियन डॉलर हो गया है।

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2020 के अनुमानों से पता चलता है कि यह राशि आगे बढ़कर 3 बिलियन डॉलर हो गई है। बीजिंग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हाल के कुछ वर्षों में सामने आए हाई-प्रोफाइल भ्रश्टाचार और स्कैंडल सहित अन्य कारणों की वजह से चीन को अपनी प्रमुख परियोजनाओं से दूर रहने के लिए मजबूर किया है। बोस्टन विश्वविद्यालय के शोध ने भी इसकी पुष्टि की है। अब चीन भी पाकिस्तान को सहयोग करने से पीछे हटने लगा है। बीजिंग इस तथ्य पर विशेष रूप से नाराज है कि परियोजनाओं में शामिल चीनी कंपनियां विभिन्न भ्रष्टाचार घोटालों में विशेष रूप से बिजली क्षेत्र में खुद को उलझाए हुए हैं।

हाल ही में पाकिस्तान के सुरक्षा और विनिमय आयोग द्वारा की गई जांच में बिजली क्षेत्र में 1.8 अरब डॉलर से अधिक की अनियमितता पाई गई है। जिसमें 16 चीनी कंपनियां सीपीईसी में शामिल थीं। ये कंपनियां अनुचित सब्सिडी प्राप्त कर रही हैं और राष्ट्रीय खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रही हैं। चीन की वैश्विक उधार रणनीति में बदलाव के पीछे अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध एक और बड़ा कारण हो सकता है। चीन की दुनिया में हो रहे विरोध के कारण भी उसे पाकिस्तान से पीछे हटना पड़ रहा है।

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