खतरे में शी जिनपिंग सरकार! कम्युनिस्ट पार्टी की पूर्व प्रोफेसर ने बताया ड्रैगन का असली चेहरा

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दुनिया में कोरोना महामारी फैलाने वाला कम्युनिस्ट देश चीन में इन दिनों अपनी ही पार्टी में खींचतान जारी है। बताया जा रहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी चीन के इस आक्रोश रवैये से नाराज हैं। दरअसल शी जिनपिंग के इस रवैये को लेकर चीन की प्रतिष्ठित पूर्व प्रोफेसर ने दावा करते हुए कहा कि मैं ही नहीं बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी शी जिनपिंग के तानाशाह रवैये का शिकार हैं। काई ने कहा, चीन एक कम्युनिस्ट शासन वाला देश है, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी में चीन के विकास की ताकत नहीं रह गई है। काई ने कहा कि हमने जब अपनी आवाज को उठाना चाहा तो उन्होंने मुझे पार्टी से निष्कासित कर दिया, वास्तव में वह चीन के विकास में बाधक बन गई है। काई न यह बात गार्जियन में प्रकाशित के खबर में अपने इंटरव्यू के जरिए कही हैं। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि केवल मैं ही अकेली नहीं हूं जो पार्टी छोड़ना चाहती हूं. और भी लोग हैं जो शी जिनपिंग के इस रवैये का शिकार हैं। इसलिए वह भी पार्टी छोड़ने का विचार बना रहे हैं।

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काई ने कहा चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के विरोध में बोलना देशद्रोह के बराबर माना जाता है. “मैं बहुत पहले ही पार्टी छोड़ देना चाहती थी, जहां बोलने के लिए इजाजत नहीं दी जाती, और मेरी आवाज पूरी तरह से दबा दी गई. हालांकि अब अपनी आवाज को बेबाकी से उठाउंगी चूंकि अब वह कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य नहीं है। काई ने यह भी कहा कि अगर इसी तरह से शी जिनपिंग का रवैया रहा तो कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों की संख्या कम होने में देर नहीं लगेगी।

यह बयान उस व्यक्ति का है जो एक समय चीन की खास शैक्षणिक संस्था में रह चुका है. सेंट्रल पार्टी स्कूल में माओ, जेनडोंग, हु जिंताओ और खुद शी जिनपिन जैसे चीन के प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टी नेता प्रमुख रह चुके हैं. इस लिहाज से यह बयान चीनी नेतृत्व के लिए एक बहुत ही खतरनाक माना जा रहा है।

बहरहाल निष्कासित होने के बाद अंग्रेजी मीडिया को दिए अपने पहले इंटरव्यू में काई ने बताया कि वो इस निष्कासन से खुश हैं. और उनके बहुत से दोस्तों ने निष्कासन की खबर पर खुशी जताई है। अपनी हक की आवाज को उठाने में कोई शर्मिंदगी नहीं है। काई ने कहा कि पहले तो उन्हें रोकने का खूब प्रयास किया गया, यहां तक कि मेरे परिवार को धमकियां तक दी गईं, लेकिन काई का मानना है कि “मेरी बातें अब किसी भी दबाव से मुक्त हैं. मैं अपने खुद के जमीर और सिद्धांतों के लिए जिम्मेदार हूं।

काई ने कहा पार्टी के अंदर ही शी जिनपिन का व्यापक विरोध है, लेकिन केवल कुछ ही लोगों में कहने की हिम्मत है चूंकि उन्हें पार्टी के अंदरूनी अनुशासन और भ्रष्टाचार के आरोपों का डर सता रहा है। इतना ही नहीं काई ने शी की अनियंत्रित ताकत को सभी गलत निर्णयों के लिए जिम्मेदार ठहराया जिसमें कोविड-19 बीमारी के फैलने को गलत तरीके से निपटना भी शामिल है। मालूम हो कि पूरी दुनिया ही अब चीन का विरोध कर रही है, कोरोना वायरस फैलाने के मामले में अमेरिका सहित कई देशों में बड़े पैमाने पर चीन का बहिष्कार किया जा रहा है, चूंकि जिस तरीके से चीन की मंशा रही है, उसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। जिसका खामियाजा चीन को एक न एक दिन तो भुगतना पड़ेगा। वहीं अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सहयोगी भी चीन के आक्रोश रवैये से नाराज दिख रहे हैं है। जिसका विरोध भी देखा जा सकता है।

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