भारतीय वैक्सीन की सफलता पर बौखलाया चीन, अब उठाने लगा सवाल

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दिल्ली। कोरोना की जंग में भारत सफल भी रहा और दुनिया के लिए मददगार रहा। भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी से चीन परेशान हो कर बौखला गया है। ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख से भारत के ‘मानवीय अभियान’ के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया है। चीन के कम्यूनिस्ट सरकार का मुखपत्र भारत की कोरोना वैक्सीन पर भी सवाल उठाया है। भारत की कोरोना वैक्सीन पाने के लिए कई देश कतार में खड़े हैं। भारत ने मित्र देशों को वैक्सीन की आपूर्ति भी कर दी है। भारत ने भूटान सहित कई देशों को कोरोना वैक्सीन बतौर गिफ्ट प्रदान कर चुका है। मुश्किल वक्त में भारत के इस प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है। नेपाल, भूटान से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक नई दिल्ली की तारीफों के पुल बांध चुके हैं। भारत की तारीफ चीन से हजम नहीं हो रहा है। भारत ने श्रीलंका और पाकिस्तान को छोड़कर सभी सार्क देशों को सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशिल्ड वैक्सीन उपहार में दे चुका है। अफगानिस्तान के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत जारी है। भारत का कहना है कि अफगानिस्तान में स्थानीय रेगुलेटर की तरफ से वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाने के बाद उसे वैक्सीन की खेप की आपूर्ति होगी।

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नई दिल्ली ने अफगानिस्तान को भरोसा दिलाया है कि वह उसकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। भारत सरकार के इन प्रयासों से भारत के सभी देशों से रिश्ते मजबूत होंगे। दुनिया में भारत के साथ प्रगाढ़ रिश्ते चीन की चिंता की सबसे बड़ी वजह है। ग्लोबल टाइम्स ने सीरम इंस्टीट्यूट में अग्निकांड के बाद भारत की वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सवाल उठाया है। अखबार ने यह भी दावा किया है कि चीन में रहने वाले भारतीय चीनी वैक्सीन को तरजीह दे रहे हैं।
भारत के प्रयासों के उलट चीन ने बहुत कम और खासकर उन देशों को वैक्सीन का दे रहा है, जहां उसे कोई फायदा नजर आ रहा है। नेपाल मे ड्रग रेगुलेटर ने अभी तक चीनी वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी है। मालदीव सरकार के सूत्रों का कहना है कि चीन की तरफ से कोविड-19 वैक्सीन की सप्लाई को लेकर कोई संकेत नहीं मिले हैं।

चीन के लिए सबसे बुरी बात यह है कि उसके करीबी कंबोडिया ने भी भारत से वैक्सीन देने का आग्रह किया है। टीके की आपूर्ति को लेकर बांग्लादेश के साथ चीन का गतिरोध है। ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है कि सीरम में लगी आग की वजह से वैक्सीन को लेकर लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है और उत्पादन पर भी असर पड़ा है। लेख में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि भारत की वैक्सीन मुख्य तौर पर दक्षिण एशियाई देशों को बतौर राहत प्रदान की गई है और अधिकांश देश वैक्सीन की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं की चलते उसे नहीं खरीद रहे। भारतीय वैक्सीन पर सवाल उठाकर चीन अपनी खीझ उतारने की कोशिश कर रहा है।

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