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काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद दुनिया में तनाव बढ़ गया है। आतंकी संगठन अरब प्रायद्वीप अल कायदा ने तालिबान को अफगानिस्तान जीतने के लिए बधाई दिया है। अलकायदा ने अमेरिकी सेना और अशरफ गनी सरकार को बेदखल करने के बाद काबुल पर सैन्य बल के साथ कब्जा करने के लिए अपने साथी आतंकवादी समूह तालिबान की प्रशंसा की है। अलकायदा ने एक बयान में सुन्नी पश्तून समूह को उसकी जीत और देश की मुक्ति के लिए बधाई दी है। इस बधाई के साथ ही जहां आतंकी संगठनों एक होने लगी है वहीं पाकिस्तान के लिए चेतावनी भी जारी हो गयी है। अल कायदा से जुड़े कई अन्य आतंकवादी समूहों ने भी अफगानिस्तान में तालिबान की जीत पर बधाई दिये हैं। सीरिया में हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस), जो तालिबान को दृढ़ता के लिए प्रेरणा के रूप में देखता है, ने भी बधाई दी है। पश्चिमी चीन में स्थित तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी (टीआईपी) ने भी तालिबान को अफगानिस्तान में उनके इस्लामिक स्टेट पर बधाई दिया है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अमेरिकी सेना से छुटकारा पाने के लिए तालिबान नेतृत्व के प्रति पहले ही निष्ठा जता चुका है। साथ ही कहा है कि वे पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाना जारी रखेंगे।

एचटीएस जो उत्तर पश्चिमी सीरिया के विद्रोहियों के कब्जे वाले हिस्सों में सबसे शक्तिशाली गुट है। एचटीएस ने अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्से पर तालिबान के नियंत्रण की तुलना प्रारंभिक मुस्लिम विजय से की। उसने बुधवार देर रात जारी बयान में कहा कि इसमें कितना भी समय लगे, धार्मिकता की जीत होगी। एचटीएस ने कहा कि उसे उम्मीद है कि देश के 10 साल के संघर्ष में उसके विरोधी राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को हटाने के तालिबान के अनुभव से सीखकर सीरिया में विद्रोही भी विजयी होंगे।

उसने कहा कि हम अपने तालिबान भाइयों और अफगानिस्तान में अपने लोगों को इस स्पष्ट जीत के लिए बधाई देते हैं और सीरियाई क्रांति की जीत की कामना करते हैं। ज्ञात हो कि एचटीएस पिछले कुछ महीनों से चरमपंथी विचारधारा से दूरी बनाकर अपनी छवि सुधारने पर काम कर रहा है। इस समूह के कुछ संस्थापक सदस्यों, जिन्हें कभी नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। इसमें अरब कमांडर शामिल हैं जो अफगानिस्तान में अल कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन के करीबी थे। उनमें से कई पिछले वर्षों में सीरिया में अमेरिकी ड्रोन हमलों में मारे गये हैं। एचटीएस ने औपचारिक रूप से 2016 में अल कायदा के साथ संबंध तोड़ लिया और देश के उत्तर-पश्चिम में सीरियाई विद्रोही समूहों के करीब भी चला गया।

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