scientist

कोरोनावायरस की महामारी पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इसका दंश झेल रही है. वहीं चीन में रहने वाले कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वायरस को लेकर हमने 13 साल पहले ही चीनी सरकार को चेतावनी दी थी लेकिन, उन्होने हमारी बात को नजरअंदाज कर दिया जिसका खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है. दरअसल हांगकांग के चार वैज्ञानिकों ने 13 साल पहले ही अपने रिसर्च रिव्यू में दुनिया को आगाह कर दिया था. इस पूरी दुनिया में महामारी आने वाली है वहीं इस वायरस को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन के वन्यजीव बाजार से सार्स की फैमिली में से ही कोरोनावायरस ने जन्म लिया है।

ये भी पढ़ें:-कोरोना वायरस से हुई 21 साल की लड़की की मौत, परिवार ने लोगों से की ये अपील

मालूम हो कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों की ओर से वायरस पर किए गए शोध के बाद जो रिसर्च होता है, उसे रिव्यू कहा जाता है यानी सभी रिसर्च का निचोड़। इन चार वैज्ञानिकों ने वही निचोड़ निकाला और दुनिया के सामने जर्नल के जरिए रख दिया। नियमत: इस जर्नल आलेख पर सरकारों व पॉलिसी मेकर्स को काम करना चाहिए था लेकिन वह सोते रहे। चीन ने तो आंखें मूंदी ही, उसके साथ पूरी दुनिया भी सोती रही।

गौरतलब है कि 12 अक्तूबर 2007 को हांगकांग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक विसेंट सीसी चेंग, सुसन्ना केपी लाउ, पैट्रिक सीवाई वू और क्वॉक युंग यूएन का एक रिसर्च रिव्यू अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रो बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ था। इसमें इन वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में वायरस पर हुई रिसर्च का रिव्यू किया था। साथ ही निष्कर्ष निकाला था कि वर्ष 2002 में दक्षिणी चीन के वन्यजीव बाजार से सार्स जैसे वायरस का उदय हुआ है और आगे चमगादड़ आदि के जरिए कोविड- 2 वायरस फैल सकता है। इस वायरस का वर्तमान में नाम कोविड-19 है, जो वही है। पांच माह से दुनिया भर में हाहाकार मचाने वाले कोरोना वायरस (कोविड-19) को लेकर अब तक पूरी दुनिया में 30 हजार से ज्यादा जाने जा चुकी है.

हांगकांग के चार वैज्ञानिकों ने 13 साल पहले ही अपने रिसर्च रिव्यू में दुनिया को आगाह कर दिया था। यह सार्स की फैमिली से ही है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च रिव्यू में यह भी कह दिया था कि कोविड- 2 अन्य वायरसों से कई गुना ताकतवर होगा। कई अन्य विश्लेषण भी किए थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि कई जीवों से वायरस निकलकर चमगादड़ में पहुंचा और वह कई गुना ताकत लेकर बाहर निकला। जानवरों ने अपने बचाव के लिए वायरस विकसित किया है।

इन वैज्ञानिकों की चेतावनी को नीति निर्माता व सभी देशों की सरकारों ने दरकिनार कर दिया। इस पर पीजीआई, पंजाब विश्वविद्यालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) जैसे प्रख्यात संस्थानों के वैज्ञानिकों ने बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 13 साल पहले इस रिसर्च पर दुनिया अगर ध्यान देती तो आज पूरे विश्व को ये हालात नहीं देखने पड़ते। हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी. इस महामारी ने पूरी दुनिया को कई दशक पीछे धकेल दिया है।

ये भी पढ़ें:-कोरोना से जीतेगा भारत, मोदी सरकार के कड़े फैसलों का दिखने लगा असर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here